– यूनिक कार्ड से ट्रांसजेंडरों की होगी खुद की पहचान, कल्याणकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ
– 15 जुलाई तक ब्लाक स्तर पर लगेगा शिविर, पंजीकरण करा उठाएं लाभ
मीरजापुर(हि.स.)। तालियों की गूंज इनकी पहचान रही है… फिर चाहे शादी-ब्याह, बच्चे के जन्म या नए घर के नजराने के तौर पर खुशी में बजती तालियां हों या फिर ट्रैफिक सिग्नल पर रुकी गाड़ियों से भीख न मिलने पर गुस्से में पटकती तालियां हों, लेकिन वक्त के साथ यह पहचान बदल रही है। कभी महिला, कभी पुरुष की पहचान की फांस में फंसे रहने वाले ट्रांसजेंडरों की अलग पहचान तो हमेशा से रही है, लेकिन अब वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
दूसरों की खुशी में ही अपनी खुशी ढूंढने वाले किन्नरों के लिए यह खबर सुकून देने वाली है। अब किन्नरों को जल्द ही यूनिक कार्ड जारी किए जाएंगे। यह उनके किन्नर होने का प्रमाण पत्र तो होगा ही, उनके पहचान पत्र (आईडी) के रूप में भी काम आएगा। यूनिक कार्ड उनके अधिकारों को संरक्षित करने के साथ उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाएगा।
किन्नरों को समाज का हिस्सा बनने व पहचान के लिए काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ता रहा है। उनकी समस्याओं को ध्यान में रखकर यूनिक कार्ड प्रदान करने की पहल में तेजी आई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी गिरीश चंद्र दुबे ने बताया कि किन्नरों को उनका अधिकार दिलाने के लिए केंद्र और प्रदेश की सरकार गंभीर है। संयुक्त सचिव भारत सरकार, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय एवं सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने समाज में रहने वाले उभयलिंगी (किन्नर) व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रमाण पत्र जारी करने एवं उन्हें आईडी कार्ड प्रदान करने के लिए निर्देश जारी किए हैं।
यूनिक कार्ड ट्रांसजेंडर के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं के साथ सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने में काफी मददगार साबित होंगे। यूनिक कार्ड के लिए किन्नर आनलाइन व आफलाइन भी पंजीकरण करा सकेंगे। इसके लिए 10 से 15 जुलाई तक सुबह 10 से तीन बजे ब्लाक स्तर पर शिविर आयोजित किए गए हैं। पंजीकरण के बाद उनका कार्ड बन जाएगा। जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, उनका पहले किन्नर होने का प्रमाण पत्र बनेगा, फिर उसके जरिए आधार कार्ड व यूनिक कार्ड बनाया जाएगा।
ऐसे करें आवेदन
जिला समाज कल्याण अधिकारी गिरीश चंद्र दुबे ने बताया कि यूनिक कार्ड प्राप्त करने के लिए कोई भी किन्नर वेबसाइट (Transgender.dosje.gov.in) पर आनलाइन आवेदन कर सकता है। इसके लिए फोटो, आधार कार्ड एवं अन्य आवश्यक अभिलेख उसे इस वेवसाइट पर अपलोड करने होंगे। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से उसे ट्रांसजेंडर पहचान पत्र एवं प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट का उद्देश्य
ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट पहचान के प्रमाण के रूप में पेश किया जाता है। ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट जारी करने के पीछे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और रोजगार के अवसरों सहित विभिन्न अधिकारों, पात्रताओं और लाभों तक पहुंचने में सहायता करना है। यह ट्रांसजेंडर के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कानूनी स्ट्रक्चर
भारत में ट्रांसजेंडर अधिकारों का सपोर्ट करने वाले कानूनी ढांचे का निर्माण सन 2014 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से हुआ, जिसने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को ‘तीसरे लिंग’ के रूप में मान्यता दी। इस फैसले ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपनी पहचान साबित करने सहित शैक्षिक अवसरों, स्वास्थ्य, रोजगार व विभिन्न अधिकारों का लाभ ले पाने की राह बनाई।
ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट थर्ड जेंडर के लिए एक पहचान
ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट व पहचान पत्र सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। यह राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त व एक अनिवार्य दस्तावेज है। इसे SMILE योजना के तहत ट्रांसजेंडर लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए लांच किया गया था। ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट व्यक्तियों को कानूनी रूप से अपनी लिंग पहचान साबित करने में सक्षम बनाता है।
कमलेश्वर शरण/पदुम नारायण
