मेरठ (हि.स.)। देववाणी संस्कृत को आम जन से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन संस्कृत भारती ने कमर कस ली है। इसके लिए ’गृह शिक्षा’ नाम का नया आयाम शुरू होगा। जिसमें घर-घर में संस्कृत का प्रयोग करने पर कार्य होगा। 19 नवम्बर से मेरठ में शुरू हो रही संस्कृत भारती की वार्षिक बैठक में इस आयाम पर विचार होगा।
चौधरी चरण सिंह विवि के नेताजी सुभाष चंद्रा बोस प्रेक्षागृह में 19 से 21 नवम्बर तक संस्कृत भारती की वार्षिक बैठक आयोजित होगी। जिसमें संस्कृत भारती के देश भर में कार्यरत पदाधिकारी, कई कुलपति, पूर्व कुलपति, कुलसचिव, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, आचार्य, लेखक, प्रशासनिक अधिकारी, अभियंता, व्यापारी, अधिवक्ता, पुरोहित, पूर्णकालिक कार्यकर्ता भाग लेंगे। संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीश देवपुजारी ने बताया कि वार्षिक बैठक की पूरी कार्यवाही संस्कृत भाषा में होगी। कोरोना काल में एक लाख से अधिक लोगों को ऑनलाइन संस्कृत में वार्तालाप करना सिखाया गया। कोरोना काल में संस्कृत भारती का कार्य तेजी से बढ़ा है।
गृह शिक्षा आयाम जोड़ने पर होगा विचार
श्रीश देवपुजारी ने बताया कि बैठक में ’गृह शिक्षा’ नामक नया आयाम काम से जोड़ने पर विचार होगा। इस आयाम के माध्यम से माता-पिता को बताया जाएगा कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। भारत में गृह शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। इस आयाम पर बैठक में विस्तार से चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 तक सभी जिलों में 50 प्रतिशत विकास खंडों में संस्कृत भारती के कार्य को विस्तार दिया जाएगा। इसकी बैठक में समीक्षा होगी।
पुरोहितों को किया जाएगा संस्कृत में पारंगत
संस्कृत भारती के जरिए पुरोहितों को संस्कृत बोलने में पारंगत किया जाएगा। अभी तक पुरोहित पूजा-पाठ के नियम तो जानते हैं, लेकिन संस्कृत में वार्तालाप करने से बचते हैं। इसलिए पुरोहितों को संस्कृत बोलने में दक्ष करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही पुरोहितों को दूसरी भाषाओं में भी पारंगत किया जाएगा।
सभी वर्गों होगा संस्कृत भारती का विस्तार
अखिल भारतीय महामंत्री ने बताया कि संस्कृत भारती का सभी वर्गों में विस्तार किया जाएगा। विशेषकर महिलाओं के बीच कार्य विस्तार होगा। इससे पूरे समाज के अंदर संस्कृत को लेकर लोगों की धारणा बदलेगी और घर-घर में संस्कृत की ऋचाएं गूंजने लगेंगी।
शुद्ध संस्कृत लिखने पर विशेष ध्यान
बताया कि अंग्रेजी भाषा टोस्ट मास्टर्स क्लब की तर्ज पर संस्कृत में भी ’विवकक्षु गण’ क्लब शुरू किया जाएगा। इसकी सहायता से शुद्ध संस्कृत बोलने का ज्ञान सीखा जा सकेगा। अभी तक संस्कृत में वार्तालाप करना लोगों को सिखाया जा रहा था, लेकिन अब शुद्ध और संक्षिप्त संस्कृत लिखने व बोलने का अभ्यास कराया जाएगा।
