-सूर्य ग्रहण की वजह से इस बार दीपावली के तीसरे दिन मनेगा अन्नकूट पर्व
वाराणसी (हि.स.)। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा बुधवार को माता अन्नपूर्णा, बाबा विश्वनाथ सहित सभी प्रमुख मंदिरों में 56 भोग की झांकी सजेगी। मंदिरों में आयोजित अन्नकूट महोत्सव में अन्न से बनाए गए 56 प्रकार के मिष्ठान-पकवान का भोग अर्पित किया जाएगा। इससे ही देवालयों और मंदिरों में विभिन्न आकृतियां उकेर कर झांकी सजाई जाएगी। इसके बाद इन 56 प्रकार के व्यंजनों के भोग को भक्तों के बीच वितरित किया जायेगा। अन्नकूट महोत्सव के साथ ही चार दिन से चल रहा मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन-पूजन का सिलसिला भी थम जायेगा। अब मां अपने स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन भक्तों को अगले साल धनतेरस के दिन से देंगी।
ज्योति पर्व मनाने के बाद अगले दिन ही अन्नकूट पर्व मनाने की परम्परा रही है लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण के चलते अन्नकूट महोत्सव दीपावली के तीसरे दिन मनेगा। काशी में मान्यता है कि माता पार्वती यहां माता अन्नपूर्णा के रूप में विराजमान हैं। माता के दरबार में खुद बाबा विश्वनाथ ने भी जगत के भरण पोषण के लिये भिक्षा मांगी थी। मान्यता है कि माता के इस दरबार में आने वाले हर भक्त के पूरे साल के भरण पोषण का जिम्मा माँ के उपर रहता है। माता के अन्नकूट की झांकी का दर्शन करने से लोगों में विश्वास है कि पूरे साल उनके घर में धन वैभव की कमी नहीं होती। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी अन्नकूट महोत्सव में लड्डूओं से बाबा के दरबार को सजाया जाता है। इसके साथ ही मगदल, मूंग का हलुआ, काजू की बर्फी, बूंदी लड्डू, बालूशाही, खुरमा, काजू का हलवा, भांग की बर्फी, और विभिन्न प्रकार के नमकीन के साथ 16 प्रकार के पकौड़ी और कच्चे-पक्के अनाज से बने पकवान भोग में चढ़ते हैं।
श्रीधर
