सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- 24 मामलों में 22 की जांच पूरी, अगली सुनवाई 29 अगस्त को
नई दिल्ली (हि.स.)। सेबी ने अडानी-हिंडनबर्ग मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। सेबी ने बताया है कि उसने कुल 24 मामलों की जांच की है, जिसमें से 22 की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में क्या मिला, इसकी जानकारी फिलहाल कोर्ट को नहीं दी गई है। सेबी ने कहा है कि वह जांच में मिले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। इस मामले पर 29 अगस्त को सुनवाई होगी।
सेबी ने 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अडानी-हिंडनबर्ग जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। 11 जुलाई को कोर्ट ने जांच पूरी करके स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 14 अगस्त तक का समय दिया था। सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी की जांच फेल है। सेबी किसी सकारात्मक नतीजे तक नहीं पहुंच सकती है।
चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता की उस दलील को नकार दिया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि कमेटी को एजेंसी सपोर्ट नहीं कर रही है। उन्होंने कहा था कि हमने 14 अगस्त तक जांच पूरी करने के का समय सेबी को दिया है। ऐसे में जांच रिपोर्ट को आने दे। चीफ जस्टिस ने कहा था कि हमें भी सेबी के दाखिल हलफनामा को पढ़ने के लिए समय चाहिए। बिना जवाब पढ़े सुनवाई उचित नहीं होगा।
कमेटी ने कहा कि अभी तक की जांच में सेबी को अडानी ग्रुप के खिलाफ केस नजर नहीं आ रहा है। हालांकि अडानी से जुड़ी 13 विदेशी संस्थाओं पर पूरी रिपोर्ट मिलनी अभी बाकी है। 2018 में नियमों में हुए बदलाव से विदेशों से जानकारी जुटाने में सेबी को समस्या आ रही है। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सेबी को अपने आंतरिक सिस्टम से अडानी पर चार रिपोर्ट मिली है। इनमें दो रिपोर्ट हिंडनबर्ग से पहले और दो रिपोर्ट बाद की हैं। इस बारे में की गई जांच में सेबी ने अडानी की ओर से कोई गड़बड़ी नहीं पाई। हालांकि कमेटी ने कहा था कि सेबी के पास काफी शक्तियां हैं, पर उसे और बेहतर बनाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को अडानी-हिंडनबर्ग मामले पर की जांच के लिए सेबी को 14 अगस्त तक का समय दिया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि रिपोर्ट देखने के बाद 30 सितंबर तक जांच खत्म करने पर आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा था कि शेयर बाजार के कामकाज में सुधार पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सभी पक्षों को दी जाएगी।
सेबी ने 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि ये आरोप निराधार है कि सेबी 2016 से अडानी ग्रुप के खिलाफ जांच कर रहा है। जिस जांच का याचिकाकर्ता हवाला दे रहे हैं, वो दरअसल 51 भारतीय कंपनियों को जारी ग्लोबल डिपॉजिट रसीदों (जीडीआर) के बारे में थी। इनमें कोई भी अडानी ग्रुप की कंपनी शामिल नहीं है। सेबी का कहना है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जिन 12 संदेहास्पद लेन-देन का जिक्र हुआ है। वो काफी जटिल है और वो दुनिया के कई देशों से जुड़ी है। उन लेन-देन से जुड़े आंकड़ों की जांच करने में काफी समय लगेगा। ऐसे में जांच के लिए 6 महीने का समय मांगने के पीछे उद्देश्य निवेशकों और सिक्योरिटी मार्केट के साथ न्याय किया जा सके।
संजय/संजीव/सुनीत
