Friday, April 3, 2026
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अडाणी ग्रुप को बड़ी राहत, एनएसई ने खत्म की निगरानी

– अडाणी इंटरप्राइजेज शॉर्ट टर्म एडिशनल सर्विलांस मेजर (एएसएम) फ्रेमवर्क से बाहर

नई दिल्ली(हि.स.)। अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट को लेकर अडाणी ग्रुप में मचा तूफान अब शांत होता नजर आने लगा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने अडाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी इंटरप्राइजेज को शॉर्ट टर्म एडिशनल सर्विलांस मेजर (एएसएम) फ्रेमवर्क से बाहर निकाल दिया है। यानी अडाणी इंटरप्राइजेज के शेयरों पर एनएसई की निगरानी खत्म हो गई है।

अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद पूरे अडाणी ग्रुप के शेयर बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। इस रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप की कंपनियों पर स्टॉक मैनिपुलेशन और एकाउंटिंग फ्रॉड करने का आरोप लगाया गया था। जनवरी के महीने में जारी हुई इस रिपोर्ट के बाद अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली शुरू हो गई थी, जिसकी वजह से घरेलू शेयर बाजार भी प्रभावित होता नजर आने लगा था।

अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में हाई वोलैटिलिटी की वजह से निवेशकों को भी काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से पिछले महीने 6 तारीख को एनएसई ने अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन, अडाणी इंटरप्राइजेज और अंबुजा सीमेंट्स को शॉर्ट टर्म एडिशनल सर्विलांस मेजर (एएसएम) फ्रेमवर्क में डाल दिया था। यानी इन कंपनियों के शेयरों पर एनएसई ने अपनी निगरानी सख्त कर दी थी। एनएसई की सख्ती का असर भी कंपनी के शेयरों के परफॉर्मेंस पर पड़ा, क्योंकि खुदरा निवेशक इन कंपनियों के शेयर में निवेश करने से हिचकने लगे।

1 सप्ताह बाद ही 13 फरवरी को एनएसई ने अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अंबुजा सीमेंट्स को शॉर्ट टर्म एडिशनल सर्विलांस मेजर फ्रेमवर्क से बाहर निकाल दिया था। अडाणी इंटरप्राइजेज पर एनएसई की सख्त निगरानी जारी रही, लेकिन अब एनएसई में अडाणी इंटरप्राइजेज को भी एएसएम फ्रेमवर्क से बाहर करके कंपनी के साथ ही कंपनी के निवेशकों को भी काफी राहत दी है।

निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए एडिशनल सर्विलांस मेजर फ्रेमवर्क की व्यवस्था की गई है। इसके तहत मार्केट कंट्रोलर सेबी और स्टॉक एक्सचेंज मिलकर किसी भी कंपनी के स्टॉक्स के अलग-अलग आयाम को परखते हैं। इस फ्रेमवर्क के तहत हाई और लो वेरिएशन, क्लाइंट कंसंट्रेशन, यूनिक पैन की संख्या, वॉल्यूम वेरिएशन, मार्केट कैप और पीई की क्राइटेरिया पर कंपनी के स्टाफ स्कोर परखा जाता है। निगरानी की प्रक्रिया के दौरान कंपनी के स्टॉक्स के भाव के उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर रखी जाती है। ताकि किसी भी तरह के मैनिपुलेशन यानी गड़बड़ी को पकड़ा जा सके और निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद जब अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में मैनिपुलेशन होने का आरोप लगा और इसकी वजह से कंपनी के शेयर मूल्य में जोरदार उठापटक होने लगी, तो एनएसई ने निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए अडाणी ग्रुप की तीन कंपनियों को शॉर्ट टर्म एडिशनल सर्विलांस मेजर फ्रेमवर्क में डाल दिया था, लेकिन सब कुछ सही पाए जाने के बाद अब इन तीनों कंपनियों को एनएसई की सख्त निगरानी के दबाव से मुक्त कर दिया गया है।

योगिता/सुनीत

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