Thursday, March 5, 2026
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अटल जी के विरोधी भी करते थे उनकी प्रशंसा : योगी आदित्यनाथ

पं. अटल बिहारी बाजपेयी मेमेरियल फाण्उडेशन की ओर से चौक स्थित कन्वेंशन में अटल जी की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित हुआ कार्यक्रम

लखनऊ (हि.स.)। देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी सबको साथ लेकर जीवन जीने वाली शक्सियत थे। वह समग्रता के साथ जीते थे।अटल जी के विरोधी भी उनकी प्रशंसा करते थे। ऐसे व्यक्तित्व को नमन करता हूं।

यह बात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ शुक्रवार को अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने अटल जी के जीवन का संस्मरण सुनाते हुए लोगों से साझा किए।

कार्यक्रम का आयोजन पं. अटल बिहारी बाजपेयी मेमोरियल फाण्उडेशन की ओर से चौक स्थित कन्वेंशन में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने ‘अटल के राम, अपने अपने राम‘ पर व्याख्यान दिया।

इस अवसर पर केन्द्रीय श्क्षिा मंत्री धर्मेंन्द्र प्रधान, यूपी के प्रभारी राधा मोहन सिंह, प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन, सतीश द्विवेदी, वरिष्ट पत्रकार हेमंत शर्मा, प्रसिद्ध हास्य कवि सर्वेश अस्थाना, युवा नेता नीरज सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे।

इससे पहले कार्यक्रम के संयोजक एवं आयोजक संस्था के अध्यक्ष बृजेश पाठक ने आए अतिथियों को स्वागत करते अटल जी से जुड़ी बातों को साझा किया। उन्होंने बताया कि हमने सभी वर्ग के लोगों को जोड़कर यह फाण्उडेशन बनाया है। इसमें व्यापारी, टैम्पो-टैक्सी यूनियन के नेता, साहित्य से जुड़े सभी लोगों को जोड़ा गया है।

कार्यक्रम में अटल जी के जीवन से जुड़े करीबी लोगों में हरीश चंद्र अग्रवाल, नानक चंद्र लखमानी, विनोद सोनकर, चंद्रिका प्रसाद लोधी, उर्मिला मिश्रा, राम अवतार कनौजिया, वेद्र प्रकाश द्विवेदी, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, रागिनी रस्तोगी, अतुल दीक्षित, शिखा गोयल, अंजनी कुमार श्रीवास्तव सहित 14 लोगों को स्मृति चिन्ह और उत्तरीय देकर सम्मानित किया गया।

इसके अलावा फाण्डेशन की ओर से अटल जी व्यक्तित्व व कृतित्व पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया । इसमें लखनऊ विश्वविद्यालय के हिमांशु पटेल, जेएनपीजी कॉलेज के अनुराग विश्वकर्मा, विश्वराज सिंह को प्रथम, द्वितीया व तृतीय पुरस्कार दिया गया। इसके अलाव एक सांत्वना पुरस्कार अभिषेक तिवारी को भी दिया गया। इन सभी को मुख्यमंत्री ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पत्रिका साहित्य गंधा के अटल अंक का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कांत तिवारी ने किया।

कुमार विश्वास ने श्रीराम के जीवन के विभिन्न प्रसंगों पर दिया व्याख्यान

जब राम आते हैं तो सब पर लग जाता है विराम

इसके बाद वरिष्ठ कवि कुमार विश्वास ने ‘अटल के राम, अपने अपने राम‘ पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने आज के माहौल और राम को जोड़ते हुए और बीच-बीच में सबकी चुटकियां लेते हुए अपना अपना कार्यक्रम पेश किया।

उन्होंने आरंभ करते हुए कहा कि जब कोई मेहमान आता है तो आप अपने घर को सजा लेते है। मेहमान को देखते हुए अपना घर सजाते हैं। आज राम आ रहे हैं तो सब सारे काम छोड़कर सुनिए । जब राम आता है तब सब पर विराम लग जाता है। उन्हाेंने मीडिया की चुटकी लेते हुए कहा कि अभी खुसुर फुसर न करों, अगले दो महीने बहुत मसाला मिलेगा।

उन्होंने बताया कि सबसे पहले वाल्मीकि के मुख से कविता फूटी। वाल्मीकि न होते सिया को मायका न मिलता और लवकुश को ननिहाल न मिलता । उन्होंने बताया राम को अपने जीवन में बहुत गालिया पड़ी। जब वह अपने ससुराल गए तो वहां पर किसी ने हंसी करते कहा कि आपके यहां तो बच्चे खीर खाकर पैदा होते हैं, तब राम तो केवल मुस्कराए, लेकिन लक्ष्मण ने कहा कि हमारे यहां तो कुछ खाकर पैदा होते हैं तुम्हारे यहां तो धरती से ही पैदा हो जाते हैं।

आगे उन्होंने कहा कि रावण में अंहकार था, राम में अंहकार नहीं था। रावण के अहंकार कई तोड़ा गया, लेकिन उसने अपने अहंकार को बनाए रखा।

इसी तरह से वह रामायण के कई प्रसंगों लेकर अपना व्याख्यान किया। उनके सुनने के लोग जमीन पर बैठे थे, खड़े थे। इसके अन्य दो हालों में लोग स्क्रीन पर कार्यक्रम देख रहे थे। उनकी चुटकियों पर श्रोताओं ने खूब ठहाकें लगाएं।

शैलेंद्र मिश्रा

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