कानपुर (हि.स.)। अंग्रेजों की गुलामी के समय स्थापित कानपुर गौशाला के सभी शाखाओं को मिलाकर कुल 12 सौ गोवंश है। योगी सरकार गोवंश संरक्षण एवं निरासित पशुओं के रहने के लिए एक बड़ा पशु शाला बनाने के लिए गौशाला एवं ग्राम समाज की जमीन तलाश रही है। लेकिन यहां तैनात अधिकारी ऐसी जमीन अब तक नहीं खोज सके। कानपुर गौशाला की पांच सौ बीघा जमीन है, जिसमें कुछ स्थानों पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। लेकिन जिलाधिकारी के कड़े निर्देश के बावजूद अवैध कब्जा नहीं हट पा रहा है।
ऐतिहासिक कानपुर गौशाला की स्थापना 1888 में एक ट्रस्ट के रूप में की गई थी। जिस वक्त इस गौशाला ट्रस्ट की स्थापना की गई उस समय गौशाला संचालित करने के लिए लगभग पांच सौ बीघा जमीन भी जुटाई गई थी।
केन्द्र की मोदी और उप्र की योगी सरकार बनने से पूर्व इस गौशाला का संचालन स्ववित्तपोषित तरीके से हो रहा था। गो सेवा आयोग बनने के बाद, सरकार की मंशा के अनुरूप इस गौशाला में निराश्रित गाय एवं बछड़े को रखने के लिए सौंपा गया।
गौशाला के प्रबंधक संजीव दुबे कहना है कि लगभग दो वर्ष से सरकार से 70 फीसदी गोवंशों के लिए चारे की धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है। इससे पूर्व गौशाला के पास मौजूद जमीन पर खेती करके गायों के लिए हरे एवं सूखे चारे का प्रबंध किया जा रहा है। वर्तमान में भी पर्याप्त मात्रा में हरा एवं सूखा चारा हमारे गौशाला की गायों के लिए हो जाता है।
आय के लिए संचालित होता है आयुर्वेदिक औषधियां बनाने का केन्द्र
प्रबंधक संजीव दुबे ने बताया कि गौशाला को संचालित करने के लिए आय की आवश्यकता होती है। उसकी पूर्ति के लिए कानपुर गौशाला सोसाइटी द्वारा पंचगव्य से निर्मित विशुद्ध आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया जाता है। उन औषधियों के विक्रय से आने वाले धन से पूरी गौशाला का संचालित किया जा रहा है। आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण कार्य वैद्य डॉ.बी.डी.चन्देल की देख रेख में कुल 35 महिलाएं एवं पुरुष करते है।
डॉ.विष्णु दत्त चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि तीन प्रकार की दवाओं का निर्माण किया जाता है।
1.मानव उपयोगी गोरत्न औषधियां
2.कृषि उपयोगी दवाएं
3.पशु उपयोगी औषधियों का निर्माण किया जाता है।
इसके अतिरिक्त मानव जीवन की उपयोगी अन्य सामानों का भी निर्माण किया जाता है। जैसे गोरत्न पंचगव्य साबुन, गोरत्न एलोवेरा साबुन, गोरत्न ग्लिसरीन साबुन, गोरत्न मंजन, गोरत्न मरहम, गोरत्न बाम, गोरत्न बाम, गोरत्न अर्क, इस तरह औषधि केन्द्र से तैयार किये जाने वाले सामानों को देश के विभिन्न हिस्सों में ही नहीं विदेशों में भी इसकी बिक्री जाती है। बिक्री से होने वाली आय से कर्मचारियों एवं पूरी गौशाला का खर्च वाहन किया जाता है।
ऐतहासिक गौशाला से सदस्य के रूप में जुड़े है शहर के कई माननीय
अंग्रेजो के समय से संचालित इस गौशाला से वर्तमान में शहर के कई माननीय ट्रस्ट सदस्य भी है। वह भी कभी कभार जाकर गौशाला देखने के लिए पहुंच जाते है। इसके कार्यकारणी सदस्य के रूप में भाजपा के विधायक भी जुड़े है।
सूत्रों की मानें तो इस ऐतिहासिक गौशाला की काफी जमीन पर कब्जा हो चुका है, जिसे मुक्त कराने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। सूत्र बताते है कि कुछ जमीन तो लीज पर भी दी गई थी जिसका समय समाप्त हो चुका है। लेकिन उसे मुक्त कराने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है।
राम बहादुर/पदुम नारायण
