लॉक्ड प्रोफाइल…………

ज्ञान सिंह सुबह-सुबह आँख खुली तो हाथ हमेशा की तरह मोबाइल की ओर चला गया और आँखें खोजने लगी कि क्या कुछ नया है। फ़ेसबुक खोला तो पाया कि भगवान … Read More

जरूर पढ़ें, एक की भक्त अंजनी नंदन से भावुक प्रार्थना

वीर विक्रम बहादुर मिश्र हे अंजनी नंदन पवनकुमार! आकंठ त्रासदी में डूबी दुनिया तुम्हारा जन्मोत्सव मना रही है। त्रेता में दुर्दांत रावण की लंका जलाकर तुमने मानवता के प्रति जो … Read More

हे राम! कभी हमने भी तुम्हारी मदद की थी, आज हमारी मदद करो

हेमंत शर्मा कहां हो राम! वर्षों से हमने तुम्हारे नाम की मालाएं जपी। दिए जलाए। हज़ारों साल से तुम्हें भगवान माना। हर साल धूमधाम से “भय प्रकट कृपाला“ गाकर रामनवमी … Read More

नो मैन्स लैंड उर्फ चिरकुट की परती

अरविंद चतुर्वेद गांव हो या शहर, जमीन की मारामारी कहां नहीं है! लोग मसान और कब्रिस्तान तक की जमीन हड़पे ले रहे। गड़ही और पोखरे धीरे-धीरे पाट डाले जाते हैं। … Read More

सलाम का जवाब!

शंभूनाथ शुक्ल आपने किसी को नमस्ते, नमस्कार, प्रणाम, सलाम या आदाब बोला, तो सामने वाले का रिस्पांस ही आपकी हैसियत को बताता है। इसे प्रत्याभिवादन कहते हैं। यह बहुत महत्त्वपूर्ण … Read More

बंसी कौल का रंग क्षेत्र और रंग रसायन

राम प्रकाश त्रिपाठी बंसी कौल! नाटक की दुनिया की जानी-पहचानी शख्सियत। यह शख्सियत वह है जो दुनिया-जहान के सामने है। बहुत ही कम बल्कि बेहद अंतरंग लोग ही जानते हैं … Read More

अनेक अनुत्तरित सवालों का जवाब है ‘हस्तिनापुर एक्सटेंशन’

हेमंत शर्मा मित्रवर उमेश प्रसाद सिंह का नया उपन्यास आया है ‘हस्तिनापुर एक्सटेंशन’। ‘इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन’ दिल्ली में है और ‘हस्तिनापुर एक्सटेंशन’ उन्होंने उत्तर प्रदेश के चंदौली में गढ़ दिया। उपन्यास … Read More

मुशायरों में सच का प्रतिशत नापते इकबाल रिजवी

देव प्रकाश चौधरी बौद्धिक आलस्य के धनी इकबाल रिजवी (अगर वे मेरे पड़ोसी न रहे होते तो शायद न जान पाता) मुशायरों के ‘कल-आज-कल’ पर अपनी उस किताब को लेकर … Read More

देवताओं की दुनिया और भूतों के डेरे

अरविंद चतुर्वेद गांव में देवता तो गिनती के थे जो आज भी हैं, लेकिन हमारे बचपन में भूतों की भरमार थी। ऐसे में सहज ही जान सकते हैं कि देवताओं … Read More

ग़ज़ल…….

ग़ालिब-ओ-मीर सी ग़ज़लों में ग़र मस्ती नहीं होती ,सुखनवर हो के भी अपनी कोई हस्ती नहीं होती। कभी मंदिर ठिकाना है कभी मस्जिद ठिकाना है,परिंदों की कभी अपनी कोई बस्ती … Read More

बैरगिया नाला जुलुम जोर, तहं साधु वेश में रहत चोर…

हेमंत शर्मा मित्रवर शंभूनाथ शुक्ल जी की एक पोस्ट में बैरगिया नाले का ज़िक्र आया। तो बचपन याद आ गया। इस लम्बी कविता की दो-दो लाइनें हम अलग-अलग सन्दर्भो में … Read More

प्यार सच्चा तो ऊपर बैजू बावरा

देव प्रकाश चौधरी छोटे से शहर में अक्सर प्यार की उम्र भी छोटी रह जाती है। जितनी गलियां, उतनी निगाहें। जगह-जगह झुंडों में अखबार पढ़ते लोग सुबह के अभिभावक और … Read More

हिंदी साहित्य के कद्दू में कितने नाखून, कितने डंठल!

देव प्रकाश चौधरी आचार्य जी ने पहले अपने योग्य शिष्य को देखा, फिर उसके हाथ में सुशोभित कद्दू को। सब्जी वाले के ठेले पर पड़े 11 में से एक कद्दू … Read More

पांच रंग-तुम्हारे लिए

संजय स्वतंत्र आज देना चाहता हूं तुम्हेंजिंदगी के पांच रंग,जानती हो न तुम,मैं अकसर क्यों तोड़ लाता हूंइंद्रधनुष तुम्हारे लिएअपनी कविताओं में? तो सुनो …श्यामल रंग प्रिय है मुझे,लेकिन इस … Read More

गजल

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम की क्या बात करूं।मैं उससे खुदसे या जमाने से सवालात करूं।।उजाले दिन को उम्मीदों में गुजार लेता हूं।अंधेरी रातों का कैसे मैं बयानात करूं।।हमें साहिल से … Read More

प्रेम लीलाओं के छह प्रकार

डा. माधव राज द्विवेदी सुदूर प्रवास के बाद प्रेमी युगल का जो मिलन होता है, वह अपूर्व आनन्द देने वाला होता है। यदि वह मिलन अचानक सम्पन्न होता है तो … Read More

इक वो भी दीवाली थी

श्वेता गोयल दीपान्विता, दीपमालिका, कौमुदी महोत्सव, जागरण पर्व में आधुनिक काल की फिल्मों ने भले ही दीवाली के प्रसंग को भुला दिया है लेकिन पुरानी फिल्मों में बताया गया दीपक … Read More

जयंती पर विशेष : जब फ़िराक ने ठुकरा दिया इंदिरा गांधी का प्रस्ताव

साहित्य डेस्क ’आने वाली नस्लें तुम पर रश्क करेंगी हमअस्रों, जब ये ख्याल आयेगा उनको, तुमने फ़िराक़ को देखा था…।’ फ़िराक गोरखपुरी की बड़ी शख्यियत को बयां करती ये लाइनें … Read More

मंगलाचरण

डॉ. वाटिका कंवल श्रीराम सब सुख धाम, सुमिरन कर सदा मन बावरेसर्वज्ञ सब गुन अज्ञ, अगुन अद्वैत सुंदर सांवरे।रश्मिल बदन शोभा सदन लख कोटि काम लजाव रेतात्विक अगुन सात्विक सगुन … Read More

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