45a

Gonda : अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक गोष्ठी आयोजित

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद अवध प्रान्त के जनपदीय इकाई की मासिक बैठक परिषद के जिलाध्यक्ष उमाशंकर शुक्ल ‘आलोक’ की अध्यक्षता में कवि चन्दन तिवारी के रुद्र फाउण्डेशन कार्यालय पर सम्पन्न हुई। गोष्ठी का कुशल संचालन परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कविवर विनय शुक्ल ’अक्षत’ ने किया। गोष्ठी में सर्वप्रथम माँ सरस्वती की प्रतिमा पर बनारस से पधारे अतिथि कवि रमाकान्त सिंह ’शेष’ द्वारा माल्यार्पण एवं उपस्थित सभी कवियों द्वारा पुष्प अर्पित किया गया। तत्पश्चात अतिथि कवि रमाकान्त सिंह ’शेष’ का शाल ओढाकर स्वागत व अभिनन्दन किया गया। कवि गोष्ठी का प्रारम्भ सर्वप्रथम उमा शंकर शुक्ल ’आलोक’ द्वारा रचित वाणी वन्दना से किया गया। इसकी प्रस्तुति अपने मधुर कण्ठ से प्रसिद्ध संगीतकार तिलकराम साहिल द्वारा की गयी, जो इस प्रकार है :
कर रहे हम वन्दना माँ शारदे।
सार्थक हो गीतिका माँ शारदे।
घोर तम अज्ञानता का नाशकर।
ज्ञान का सूरज उगा माँ शारदे।।
इसी क्रम में युवा कवि मुकेश सोनी ने देश प्रेम से परिपूर्ण निम्न रचना पढ़ी :
प्राण जाए भाव पर यह शेष रहना चाहिए।
हम रहें या न रहें यह देश रहना चाहिए।।
कवि प्रेम गोण्डवी की यह पक्तियां श्रोताओं द्वारा खूब सराही गई :
पिता इष्ट भ्राता भुजा, मैया चारो धाम।
छेना जैसी प्रेमिका, पत्नी कालाजाम।।
कवयित्री ज्योतिमा शुक्ला ‘रश्मि’ की निम्न प्रस्तुति से श्रोतागण भावविभोर हो उठे :
जिन्दगी की जंग में ऐसे न हारा कीजिए।
जब तलक है जिन्दगी इसको संवारा कीजिए।
कवयित्री सुश्री नीता सिंह द्वारा अपनी इस रचना के माध्यम से प्रेम यूँ परिभाषित किया :
पावन पुनीत सदकर्म प्रेम ही होता है।
जीवन संकट मर्म प्रेम ही होता है।
तोड़ो मजहब की दीवारें मिलजुल कर,
मानवता का धर्म प्रेम ही होता है।
परिषद के महामंत्री कविवर हरीराम शुक्ल ‘प्रजागर’ ने अवधी भाषा में अपने उद्गार कुछ यों व्यक्त किये :
बरसो रे बाग वन खेत खरिहनवां मां अंगना मां बरसो दुवारे न्यारे बदरा।
उमड़ घुमड़ जग प्यास बुझाओ कि परहित देह संवारे धारे बदरा।।
युवा कवि आशीष श्रीवास्तव ने सूखा प्रकोप पर केन्द्रित अपनी यह रचना पढ़ी :
इन्दर देवता अब तनि हरसौ।
सावन लगि गा अब तो बरसौ।
कवि उमेश चन्द्र सोनी ने पढ़ा :
पूरे दिन का खर्चा लइले, ओ मेरी फगुनियां चिलमियां दइदे रात न बीते।।
परिषद के संरक्षक एवं वरिष्ठ कवि साहित्य भूषण शिवाकान्त मिश्र ’विद्रोही’ की ये पंक्तियां श्रोताओं द्वारा खूब सराही गई :
शायर सिंह सपूतों की अनचली लीक होती है।
कायर बेटे की माता से बांझ ठीक होती है।
यह कड़वा सच है सीधी उंगली घी नहीं निकलता।
शठ के सम्मुख केवल शठता ही सटीक होती है।
साहित्य परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र बहादुर सिह ’झंझट की इन पंक्तियों ने खूब वाहवाही लूटी :
अपने भारत वर्ष की पहचान है हिन्दी।
गौरव है. गरिमा है, हिन्दुस्तान है हिन्दी।
तुलसी की चौपाई और कबीरा की साखी।
सूर श्याम की मनमोहक मुस्कान है हिन्दी।।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष कविवर उमा शंकर शुक्ल ’आलोक’ की यह पंक्तियां श्रोताओं द्वारा खूब सराही गयी :
कर गये कुछ लोग ऐसी रहनुमाई दोस्तों,
बस्तियों में भुखमरी की शाम आई दोस्तों।
सभ्यताएं नग्न होकर नाचती फुटपाथ पर,
आस्था विश्वास की बदली रुबाई दोस्तों।।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय शुक्ल अक्षत’ की यह रचना सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो उठे :
किसी आलोकमय व्यक्तित्व की खुशबू अलग होती,
गुलाबों को लगाते क्या किसी ने इत्र देखा है?
युवा कवि अमित ’निर्भय’ ने देश भक्ति से परिपूर्ण यह रचना पढ़ी :
देह के हो भले लाख टुकड़े मगर, देशहित में समर्पित रहेंगे सदा।
सुप्रसिद्ध कहानीकार राजेश मोकलपुरी ने कई लघुकथाएं और व्यंग्य कथाएं प्रस्तुत की जिसको श्रोताओं द्वारा पूर्ण तन्मयता पूर्वक सुना गया एवं करतल ध्वनि से सराहना की गयी।
कवि अजय कुमार पाण्डेय ने आज की पारिवारिक रिश्तों का चित्र अपनी रचना के माध्यम से कुछ यूं प्रस्तुत किया :
बूढ़े बाप को पानी पिलायेगा कौन, जवान बेटों का अपना अलग हिसाब है।
युवा कवि प्रमोद यादव ’रंजन’ ने हिन्दी भाषा पर केन्द्रित यह रचना पढ़ी :
हिन्दी पढ़ लो, हिन्दी लिख लो, हिन्दी सबसे आसान लगे,
हिन्दी ही हिन्द की ताकत है, हिन्दी ही हिन्दुस्तान लगे।
वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम अवस्थी द्वारा आज की व्यवस्था पर निम्न व्यंग्य प्रस्तुत किया गया, जिसे श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया :
दुइ साधू हर गांव मां करत बहुत उपकार।
यक तौ हैं परधान जी दोसर कोटेदार।
बनारस की धरती से पधारे लब्धप्रतिष्ठ वरिष्ठ गीतकार रमाकान्त सिंह ’शेष’ की इस रचना की प्रस्तुति से श्रोतागण भाव विभोर हो उठे :
मै करील के वन में शीतल चंदन ढूंढ रहा हूँ।
विरथ राम की खातिर रण में स्यंदन ढूंढ रहा हूं।
मेरी छोटी सी बगिया में सुरभित पुष्प बहुत हैं।
पारिजात की अभिलाषा में नंदन ढूंढ रहा हूँ।।
अन्त में कवि गोष्ठी के सफल आयोजन पर अखिल भारतीय साहित्य परिपद गोण्डा के जिलाध्यक्ष उमा शंकर शुक्ल ’आलोक’ ने गोष्ठी में उपस्थित सभी अतिथियों, साहित्यकारों व सुधी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया तथा धन्यवाद ज्ञापित किया।

45

कलमकारों से ..

तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com पर प्रकाशन के इच्छुक कविता, कहानियां, महिला जगत, युवा कोना, सम सामयिक विषयों, राजनीति, धर्म-कर्म, साहित्य एवं संस्कृति, मनोरंजन, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक इत्यादि विषयों पर लेखन करने वाले महानुभाव अपनी मौलिक रचनाएं एक पासपोर्ट आकार के छाया चित्र के साथ मंगल फाण्ट में टाइप करके हमें प्रकाशनार्थ प्रेषित कर सकते हैं। हम उन्हें स्थान देने का पूरा प्रयास करेंगे :
जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
E-Mail : jsdwivedi68@gmail.com

error: Content is protected !!