विकास दुबे प्रकरण पर गठित एसआईटी को कोई भी दे सकता है जानकारी, ईमेल-फोन नम्बर जारी

-अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी के कार्यालय से की जाएगी कार्यवाही

लखनऊ(एजेंसी))। कानपुर नगर में चर्चित विकास दुबे प्रकरण को लेकर गठित तीन सदस्यीय विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) जहां जांच में जुट गई है। वहीं एसआईटी का कार्यालय बनाने के साथ अब लोगों से अपील की गई है कि यदि वह प्रकरण को लेकर कोई अभिलेख, साक्ष्य या जानकारी देना चाहते हैं तो उपलब्ध करा सकते हैं। उनका नाम गोपनीय रखा जाएगा। इस सम्बन्ध में फोन नम्बर, व ईमेल भी जारी कर दिया गया है।   
एसआईटी के अध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव, संजय आर. भूसरेड्डी (आईएएस) हैं। वहीं अपर पुलिस महानिदेशक, हरिराम शर्मा तथा पुलिस उप महानिरीक्षक, जे. रविन्दर गौड़ को सदस्य बनाया गया है। यह समिति अपनी जांच पूर्ण करके इस महीने 31 जुलाई तक रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करायेगी। 
जांच की कार्यवाही संजय आर. भूसरेड्डी के बापू भवन स्थित चतुर्थ तल पर कार्यालय कक्ष संख्या-401 में सम्पादित की जायेगी तथा जांच के लिए घटना से सम्बन्धित अभिलेख, कथन व साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए जनसामान्य, जनप्रतिनिधि आदि द्वारा पत्र व्यवहार के लिए पता, ई-मेल sit-kanpur@up.gov.in एवं एसआईटी के दूरभाष संख्या-0522-2214540 का उपयोग करके कार्यालय में प्रवेश किया जा सकता है। इसके साथ ही व्यक्तिगत रूप से मिलकर साक्ष्य आदि उपलब्ध कराने के लिए 20 जुलाई से 24 जुलाई तक इस कार्यालय में अपराह्न 12ः00 बजे से अपराह्न 02ः00 बजे के बीच सम्पर्क किया जा सकता है।
समिति घटना के सम्बन्ध में इन 09 बिन्दुओं पर जांच कर सौंपगी अपनी रिपोर्ट 


1. पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में आये कारणों जैसे अभियुक्त विकास दुबे के विरुद्ध जितने भी अभियोग प्रचलित है उन पर अब तक क्या प्रभावी कार्यवाही की गयी? इसके तथा इसके साथियों को सजा दिलाने हेतु कृत कार्यवाही क्या पर्याप्त थी़? इतने विस्तृत आपराधिक इतिहास वाले अपराधी की जमानत निरस्तीकरण की दिशा में क्या कार्यवाही की गयी? 
02. अभियुक्त विकास दुबे के विरुद्ध कितनी जन-शिकायतें आयीं और उन पर थानाध्यक्ष चौबेपुर द्वारा तथा जिला के अन्य अधिकारियों द्वारा क्या जांच की गयी व पाये गये तथ्यों के आधार पर क्या कार्यवाही की गयी इसका विस्तृत परीक्षण करना।
03. अभियुक्त विकास दुबे तथा उसके साथियों के विरुद्ध गैंगेस्टर एक्ट, गुण्डा एक्ट, एनएसए आदि अधिनियमों के अन्तर्गत क्या कार्यवाही की गयी तथा यदि कार्यवाही किये जाने में लापरवाही रही तो किस स्तर पर लापरवाही रही?
04. अभियुक्त विकास दुबे एवं उसके साथियों के पिछले एक वर्ष के सीडीआर का परीक्षण करना एवं उसके सम्पर्क में आये सभी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध संलिप्तता की साक्ष्य मिलने की दशा में उपयुक्त एवं कड़ी कार्यवाही करने की अनुशंसा करना।
05. घटना के दिन क्या अभियुक्तों के पास उपलब्ध हथियारों एवं उसके फायर पावर के विषय में सूचना संकलन में लापरवाही की गयी। यह किस स्तर पर हुई, क्या थाने में इसकी समुचित जानकारी नहीं थी। इस तथ्य को भी जांच करना एवं दोषी यदि कोई हो तो चिह्नित करना।
06. विकास दुबे एवं उसके साथियों के पास शस्त्र लाइसेंस एवं शस्त्र होना ज्ञात हुआ है। यह देखा जाना होगा कि इतने अधिक अपराधों में संलिप्त रहने के बाद भी इनका हथियार का लाइसेंस किसके द्वारा एवं कैसे दिया गया और लगातार अपराध करनें के बाद भी यह लाइसेंस और हथियार उसके पास कैसे बना रहा?
07. अभियुक्त विकास दुबे एवं उसके साथियों के द्वारा अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति, व्यापारों एवं आर्थिक गतिविधियों का परीक्षण करते हुए उनके संबंध में युक्तियुक्त अनुशंसाएं करना तथा यह भी इंगित करना कि स्थानीय पुलिस ने इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई, लापरवाही या संलिप्तता तो प्रदर्शित नहीं की एवं यदि ऐसा हुआ है, तो किस स्तर के अधिकारी दोषी है?
08. अभियुक्त विकास दुबे एवं उसके साथियों के द्वारा क्या सरकारी तथा गैरसरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया गया है? यदि हां तो इसमें क्या अधिकारियों की भी भूमिका है तथा वह अधिकारी कौन-कौन है, उनका उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाय। अवैध कब्जा हटवाना जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी, यदि उनके द्वारा अवैध कब्जा नहीं हटवाया गया है तो उनका भी उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाना सुनिश्चित किया जाय।
09. इस प्रकरण के अभियुक्तों व उनके साथियों के साथ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता तथा अभियुक्तों व उनके फाइनेन्सर्स की सम्पत्तियों व आय के स्रोतों की जांच प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग से कराने पर भी विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) द्वारा अभिमत उपलब्ध किया जाय।

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