Saturday, March 14, 2026
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UP News : गौतम बुद्ध की गाथा कह रही कुशीनगर की दीवारें, प्रसंग देख लोग हो रहे भावविभोर

कुशीनगर (हि.स.)। इन दिनों गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में कदम रखने वाले हर देशी विदेशी व्यक्ति को एक अलग तरह की अनुभूति हो रही है। दरअसल यहां के प्रमुख भवनों की बाहरी दीवारों पर दिख रहे बुद्ध के जीवन प्रसंग से जुड़े नजारे लोगों को भावविभोर कर दे रहे हैं। 
 बुद्ध का शिष्यों को उपदेश, गृह त्याग, अंगुलिमाल प्रसंग, वर्षावास, ज्ञान प्राप्ति, सुजाता की खीर, निर्वाण पूर्व उपदेश आदि प्रसंगों के साथ-साथ बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थलों को चित्रों के माध्यम से दीवारों पर उकेरा जा रहा है। इस माध्यम से नगर की खूबसूरती निखारने की यह अभिनव पहल ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा की है। बुद्ध इंटर कालेज, बुद्ध पीजी कालेज, बुद्ध विपश्यना केंद्र, बुद्धा छात्रावास, बिरला धर्मशाला हो होटल पथिक निवास, पार्किंग एरिया, मिनी स्टेडियम, बौद्ध मॉनेस्ट्री यानी हर वो बिल्डिंग जिसकी बाहरी दीवारें सड़क से लगी है, उन सभी को पेंटिंग अभियान की जद में शामिल किया गया है। 
 अगस्त माह में कसया एसडीएम व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा ने कार्यभार संभालते ही नगर की खूबसूरती निखारने को अपनी प्राथमिकता बताई थी। उसी समय उन्होंने इसके लिए पेंटिंग को एक बढ़िया माध्यम बताया था। इसके पूर्व यह दीवारें उत्पादों के प्रचार व पोस्टर चिपकाने के काम आती थी। लोग दीवारों की ओर मुख करके लघुशंका करते, जहां तहां दीवारों पर पान गुटखा की पींके देखने को मिलती थी। एसडीएम ने कुशीनगर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण से बजट मुहैया कराकर इन दीवारों से गंदगी का नामोनिशान मिटा दिया। दूसरी तरफ जनसहयोग से इन दीवारों के किनारे खूबसूरती बिखरने वाले पाम, मौलश्री, अशोक, चितवन आदि के पौधे रोपित किये जाने का अभियान भी गति पकड़ रहा है। 
आगे जारी रखने का दायित्व सभी का 
कुशीनगर एक अंतर्राष्ट्रीय महत्व का स्थल है। एयरपोर्ट शुरू होने से इसकी महत्ता और बढ़ गई है। ऐसे में शहर साफ सुंदर व गरिमामय दिखना चाहिए। वास्तव में यह जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नही बल्कि नागरिकों की भी है। इसे आगे जारी रखने का कार्य सभी को मिलकर करना होगा” पूर्ण बोरा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कसया। 
संरक्षण के लिए कराएं संकल्प
वाइटल केयर फाउंडेशन के सचिव डॉ. ए.के. सिन्हा ने कहा कि पेंटिंग व पौधरोपण के रखरखाव व सुरक्षा संरक्षण की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। संस्थाओं में एकत्रीकरण के दौरान सामूहिक रूप से व स्थानीय लोगों की बैठक कर संकल्प दिलाया जाना बेहतर माध्यम होगा”। 

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