Lucknow News:आपदा में अवसर की तलाश है ‘थैंक यू लॉकडाउन’

लखनऊ (हि.स.)। ‘थैंक यू लॉकडाउन एक सकारात्मक चश्मे से’ डॉ. नेहाश्री श्रीवास्तवा की कोरोना काल में लिखी गई कोविड-19 पर आधारित पुस्तक है। 122 पृष्ठ की इस पुस्तक में कोविड-19 को लेकर कुल जमा 42 लेख हैं। ये लेख अपने काल-कलेवर में छोटे हो सकते हैं लेकिन जागरूकता के लिहाज से आमजन के लिए उपयोगी भी हैं और संग्रहणीय भी। इन लेखों के बीच छोटे-छोटे आप्त वाक्य भी हैं जो पाठकों का मार्गदर्शन करने में अतीव सहायक हैं। वैसे तो यह पुस्तक आपदा को अवसर में बदलने के परिणामस्वरूप जनमानस के समक्ष आई है जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। 

यह इस बात का संदेश है कि आपदा के क्षणों में जब जन-जीवन ठहर सा जाता है। लोग किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाते हैं तब भी समाज का एक बड़ा तबका गतिशाील रहता है। वह समाज को प्रेरत और प्रोत्साहित करने के तौर-तरीके तलाशता रहता है। प्रस्तुत पुस्तक भी इसी तलाश का हिस्सा है।
इस पुस्तक का लेखिका ने नौ तस्वीरों में वर्गीकरण किया है। हर तस्वीर अपने आप में खास है। नौवीं तस्वीर कविता की है जिसमें लेखिका ने कुछ अपनी और कुछ औरों की कविताओं के जरिए कोरोना काल में लोगों को ढांढस बंधाने की कोशिश की है। लेखिका ने कोरोना काल में एक मनोवज्ञानिक के तौर पर अपनी उपलब्धियों का ब्यौरा भी दिया है। हालांकि उन्होंने इसके लिए आंग्ल भाषा का सहारा लिया है। अगर वे इसके लिए भी हिंदी का आश्रय लेतीं तो कदाचित सोने पर सुहागा वाली बात होती लेकिन हिंदी-अंग्रेजी का यह कॉकटेल अपनी ओर आकर्षित तो करता ही है। लेखिका ने हम होंगे कामयाब एक दिन गीत के साथ वैसे तो अपनी पुस्तक का समापन किया है लेकिन कोरोना काल की अपनी दैनिक गतिविधियों का ब्योरा देकर उन्होंने आम जन को गतिशाील और सक्रिय रहने की प्रेरणा भी दी है। हम होंगे कामयाब एक दिन गीत जहां आम आदमी को आगे बढ़ने की हिम्मत देता है वहीं, साथ-साथ चलने, साथ-साथ बोलने और व्यवहार करने की भी प्रेरणा देता है। लेखिका ने अलग-अलग फिल्मी धुनों पर आधारित चार कविताएं लिखी हैं। ‘पल-पल सबके पास मोदी जी तुम रहते हो’ कविता बहुत कुछ कहती है। वह सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के उनके नारे की विचारधारा को आगे भी बढ़ाती है। 

पुस्तक की शुरुआत सकारात्मकता से हुई है और इसका पूर्ण बिंदु भी सकारात्मकता ही है। समस्या समाधान और निर्णय प्रक्रिया शीर्ष लेख में वे समाधान केंद्रित भारत पर जोर देती हैं। उनका मानना है कि अपनी ताकत को भी हथियार बना लिया जाए तो समस्या का समाधान तनिक भी मुश्किल नहीं है। अंदर ही अंदर टूट जाते हैं और मकान खड़े रहते हैं बेशर्मों की तरह ‘कविता को आधार बनाकर उन्होंने लिखा है कि इस लॉकडाउन ने बहुत से टूटे घरों को जोड़ा भी होगा और बहुत से मकानों का घर भी बनाया होगा। उन्होंने कहा है कि घर का जीवन अच्छा जीवन-सच्चा जीवन। ऐसा जीवन नसीब वालों को मिलता है। 

कोरोना योद्धाओं को सलाम, खाकीकर्मी बना खास दोस्त, स्वास्थ्यकर्मी कहें या भगवान शीर्षक से छपी दर्जनाधिक रचनाएं पाठकों को अपनी ओर खींचती भी हैं और देश के लिए उन्हें कुछ सार्थक और सकारात्मक करने की प्रेरणा भी देती हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की बात-‘शिखर तक पहुंचने के लिए ताकत चाहिए होती है चाहे वह माउंट एवरेस्ट का शिखर हो या आपका पेशा’ के जरिये उन्होंने अपनी बात बढ़ाई है। उन्होंने लिखा है कि मैंने लॉकडाउन में लोगों को कुछ पल मुस्कुराते भी देखा है।
संक्षेप में कहूं तो यह पुस्तक बेहद उम्दा बन पड़ी है। मुद्रण की कुछ त्रुटियां खटकती भी हैं लेकिन लेखिका का यह प्रथम प्रयास है। इसलिए भी सराहना योग्य है। अगर यह कहें कि लेखिका का श्रम सार्थक हो गया है तो किंचित गलत नहीं होगा। उम्मीद करता हूं कि डॉ. नेहाश्री श्रीवास्तव जो नेशनल पीजी कॉलेज में मनोविज्ञान की सहायक प्रोफेसर भी हैं, का यह सारस्वत प्रयास पाठकों को पसंद आएगा। उनकी महनीय रचनाधर्मिता के लिए एक बार पुनश्च धन्यवाद।
पुस्तक-थैंक यू लॉकडाउन एक सकारात्मक चश्मे सेलेखिका-डॉ. नेहाश्री श्रीवास्तवाप्रकाशक-गुरुकुल पब्लिशिंग, हैदराबाद

error: Content is protected !!