Sunday, April 12, 2026
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Kanpur News : बड़े भाग्य से व्यक्ति को जीवन में परोपकार का मिलता है अवसर – डीआईओएस

– हर किसी को दुःख के क्षणों में खड़े होना चाहिए साथ : डॉ अंगद सिंह

– इण्डियन रेडक्रॉस सोसाइटी ने ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन में कम्बल बांटे

कानपुर (हि. स.)। पूरे उत्तर भारत में सर्दी का प्रकोप बढ़ रहा है। जिसके कारण लगातार तेज सर्द हवाएं चल रही है। तो वहीं गरीब असहाय लोगों को मदद के लिए समाजसेवी संस्थाएं लगातार प्रयास कर रही है। वहीं इसी कड़ी में इण्डियन रेडक्रॉस सोसाइटी ने ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इण्टर कालेज में कम्बल वितरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
मुख्य अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश कुमार तिवारी ने निर्धन-वंचित वर्ग के 40 जरूरतमंद लोगों को कम्बल प्रदान किये गये। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। व्यक्ति सम्पूर्ण जीवन अपनी ही आवश्यकताओं की पूर्ति में संलग्न रहता है। बड़े भाग्य से व्यक्ति को जीवन में परोपकार के अवसर प्राप्त होते हैं। किसी के दुःख में सहभागी होना ऐसी मानवीय संवेदना प्रत्येक व्यक्ति में होनी चाहिए।
यदि ऐसा हो सका तो अपने आस-पास कोई भी अभाव व कष्ट में नहीं जीयेगा। इण्डियन रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव आर के सफ्फड़ ने कहा कि रेडक्रॉस सोसाइटी एक ऐसी संस्था जो देश भर में पूरे वर्ष इस प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम चलाकर अनेक प्रकार से मानव सेवा करती है। उसी श्रृंखला में यह एक छोटा सा प्रयास है। ध्यान देने योग्य है कि दुःख बांटने से घटता है और सुख बांटने से बढ़ता है यदि हम किसी का दुःख बांट सकें तो इसी में जीवन की सार्थकता है। 
इण्डियन रेडक्रॉस सोसाइटी के कोषाध्यक्ष डॉ अंगद सिंह ने कहा कि पर दुःख कातरता एक ऐसा उच्च जीवन मूल्य है जो मनुष्य में दैवीय गुण का समावेश करता है। यदि हम किसी के दुःख-कष्ट के क्षणों में उसके साथ खड़े हो सके तो निश्चय ही समझना चाहिए कि ईश्वर ने अपने जीवन को उन्नत बनाने का एक अवसर दिया है। व्यक्ति प्रायः अपनी व अपने परिवार की उदरपूर्ति के लिए ही लगा रहता है। उसका ध्यान उस व्यक्ति की ओर नहीं जाता जो उसी के आसपास अभाव में अत्यन्त दैन्यतापूर्ण जीवन जी रहा होता है। रेडक्रॉस सोसाइटी जैसी सामाजिक संस्थाओं के द्वारा अभियान चलाकर उनके हितार्थ प्रयत्न किये जाते हैं।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रबन्ध निदेशक पूजा अवस्थी, प्रधानाचार्य राममिलन सिंह, उमा सक्सेना, कविता सिंह आदि मौजूद रहे।

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