Friday, February 13, 2026
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75,000 मछलियों के बच्चों को अस्सी घाट किनारे गंगा में छोड़ा गया

– नदियों में बढ़ते प्रदूषण के जैव नियन्त्रण में मछलियों की महत्वपूर्ण भूमिका

वाराणसी (हि.स.)। जीवनदायिनी गंगा सहित विभिन्न नदियों में जलीय प्रदूषण को कम करने तथा जलीय पर्यावरण को संतुलित रखने के उद्देश्य से भारत सरकार की संस्था राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड, हैदराबाद ने बड़ी पहल की है। राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एन.एफ.डी.बी.) ने प्रदेश सरकारों से मिलकर प्रमुख नदियों में मत्स्य सम्पदा में वृद्धि के लिए रिवर रैंचिंग का कार्यक्रम शुक्रवार से शुरू किया है।

75,000 मछलियों के बच्चों को अस्सी घाट किनारे गंगा में छोड़ा गया

वाराणसी में भी मत्स्य विभाग ने अस्सी घाट पर निदेशक, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण कोच्ची, केरल एम० कार्तिकेयन के मुख्य आतिथ्य में मत्स्य अंगुलिकाओं को गंगा नदी की मुख्य धारा में प्रवाहित किया गया। इस कार्य में 95 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और एनडीआरएफ के साथ सामाजिक संस्था के कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। उप निदेशक मत्स्य एन०एस० रहमानी ने बताया कि 75,000 मत्स्य अंगुलिका (मछली के बड़े आकार के बच्चे) जो गंगा नदी से ही पकड़ी गयी मछलियों से अण्डे दिलाकर हैचरी पर तैयार किये गये हैं। इन्हें पुन: गंगा में छोड़ा गया।

उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन आधारित प्रदूषण को सर्वोच्च गुणवत्ता की प्रोटीन में बदलने की मछलियों की क्षमता के कारण ही रिवर रेंचिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य में जल्द ही पुनः रिवर रैचिंग के कार्य को कराया जायेगा। इस दौरान जल और पर्यावरण संरक्षण के साथ गंगा की निर्मलता के लिए शपथ भी दिलाया गया।

इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी, भूतपूर्व निदेशक मत्स्य, उ०प्र० एस0के0 सिंह, प्रदेश के पर्यावरण एवं वन विभाग के ब्रांड एम्बेसेडर अनिल सिंह, सुरेंद्र चौधरी (उप महानिरीक्षक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल रेंज चंदौली), 95 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महेंद्र मिश्रा (उप कमांडेंट) आदि की खास मौजूदगी रही।

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