Wednesday, February 11, 2026
Homeजानकारीष को कब ष तथा कब ख पढ़ते हैं?

ष को कब ष तथा कब ख पढ़ते हैं?

नालेज डेस्क

पहले इस वर्ण की ध्वनि के बारे में कुछ जानकारी, तथा इस ध्वनि के रूपान्तरित होकर प्राकृत भाषाओं से होते हिन्दी तथा अन्य आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में आने की कुछ जानकारी। ’ष’ संस्कृत में एक विशिष्ट ध्वनि है, जिसका प्राकृत भाषाओं तथा उनसे उत्पन्न आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में समुचित उच्चारण नहीं हो पाता है। संस्कृत भाषा के ’ष’ का उच्चारण मूर्धन्य है, अर्थात इसके उच्चारण के लिए जीभ को पीछे की ओर घुमा कर ट-वर्ग के व्यञ्जनों के समान किया जाता है। और यही इसका शुद्ध उच्चारण है। यह भाषा-विज्ञान की दृष्टि में एक “अघोष मूर्धन्य संघर्षी“ वर्ण है। संस्कृत भाषा की यह ध्वनि ’श’ और ’ख़’ (’ख’ का संघर्षी स्वरूप) के मध्य की है, अतः प्राकृत भाषाओं में इसका दोनों ही ओर ह््रास हुआ है। प्राकृत में बहुधा सभी संघर्षी ध्वनियों (श, ष तथा स) का स के रूप में सरलीकरण हुआ है, तथा अन्य सभी वर्णों के भारतीय आर्य भाषाओं में संघर्षी ध्वनियों के स्थान पर स्पर्श्य रूप में ही उच्चारण करने की परम्परा रही है जिससे ’ख़’ के रूप में हुआ सरलीकरण ’ख’ के रूप में ही किया जाता रहा है। किन्तु, साधारणतया हिन्दी भाषियों को ’ष’ की ध्वनि बोलने में कठिनाई होती है, अतः इसका उच्चारण ’श’ अथवा अनेक लोग ’स’ की भाँति करते हैं।

यह भी पढ़ें : तालाब में मिली तीन बच्चों सहित मां की लाश

आवश्यकता है संवाददाताओं की

तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com को गोण्डा जिले के सभी विकास खण्डों व समाचार की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों तथा देवीपाटन, अयोध्या, बस्ती तथा लखनऊ मण्डलों के अन्तर्गत आने वाले जनपद मुख्यालयों पर युवा व उत्साही संवाददाताओं की आवश्यकता है। मोबाइल अथवा कम्प्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग का ज्ञान होना आवश्यक है। इच्छुक युवक युवतियां अपना बायोडाटा निम्न पते पर भेजें : jsdwivedi68@gmail.com
जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
मोबाइल – 9452137310

RELATED ARTICLES

Most Popular