Tuesday, March 24, 2026
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लोस चुनाव : नवाबों की नगरी रामपुर का कौन बनेगा सरताज

लखनऊ (हि.स.)। रामपुर जिला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद डिवीजन में आता है। यह जिला उत्तर में उधम सिंह नगर जिला, पूर्व में बरेली, पश्चिम में मुरादाबाद और दक्षिण में बदायूं जिले से घिरा हुआ है। इस जिले का क्षेत्रफल 2,367 वर्ग किलोमीटर है। रामपुर अंग्रेजी शासन के दौरान देश की मशहूर रियासतों में से एक था। इस शहर को यहां के पहले नवाब फैजउल्ला खान ने सितंबर 1774 ईस्वी में बसाया था। इससे पहले यहां कठेर नाम का जंगल हुआ करता था और राजा राम सिंह जो कि कठेरिया राजपूत थे, वह कुछ लोगों के साथ जंगल में एक छोटे से हिस्से में निवास किया करते थे। जब नवाब फैजउल्ला खान रामपुर आए तो दोनों में शिष्टाचार मुलाकात हुई और समझौता हुआ। इसके बाद इसको रामपुर स्टेट के नाम से जाना जाने लगा।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में रामुपर लोकसभा सीट की अपनी अहमियत है। देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश के महत्व से सब परिचित हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से नजर डालें तो उप्र में कई सीटें ऐसी हैं जिन्हें राजनीति की धुरी भी कहा जाता है। ऐसी ही एक सीट है रामपुर। इस शहर को वैसे रामपुरी चाकू के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन राजनीतिक इतिहास में इसे आजम खान के शहर के तौर पर देखा जाता है। कभी आजम खान का मजबूत किला कहे जाने वाले रामपुर में आज भाजपा काबिज है। इस सीट की एक खासियत यह है कि यहां से देश के पहले सांसद भारत के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबदुल कलाम आजाद थे।

रामपुर सीट का संसदीय इतिहास

रामपुर संसदीय सीट के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो रामपुर जिले की सियासत की बात करें तो यहां की राजनीति नवाब परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। 50, 60, 70, 80 व 90 के दशक में रामपुर के नूर महल से ही कांग्रेस पार्टी के टिकट के बंटवारे होते थे। नवाब जुल्फिकार अली खां ने सन 1967 में कांग्रेस को अपने पहले ही लोकसभा चुनाव के दौरान दिखाई थी। कांग्रेस पार्टी में रामपुर लोकसभा सीट से नवाबी खानदान जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां और उनके परिवार का दबदबा रहा है। पार्टी में दबदबे को कायम करने के लिए नवाब परिवार ने मौका मिलने पर अपनी ताकत का बखूबी एहसास भी कराया है।

देश 1952 में हुए पहले संसदीय चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मोलाना अबुल कलाम आजाद ने यहां जीत दर्ज की थी। 1952 से 1971 तक के चुनाव में यहां कांग्रेस प्रत्याशी ही जीत दर्ज करते रहे। 1977 में जनता पार्टी ने यहां कब्जा जमाया। संसदीय इतिहास में इस सीट पर दस बार कांग्रेस ने, चार बार भाजपा, तीन बार समाजवादी पार्टी और एक बार जनता पार्टी को जीत मिली है। इस सीट पर कभी कोई निर्दलीय नहीं जीता। भाजपा का पहली बार यहां खाता 1991 के आम चुनाव में राजेंद्र कुमार शर्मा ने खोला था। 1998, 2014 में भाजपा प्रत्याशी क्रमश: मुख्तार अब्बास नकवी और डॉ. नैपाल सिंह विजयी हुए। 2022 में हुए उपचुनाव में भाजपा के घनश्याम सिंह लोधी ने सपा से ये सीट छीन ली। 17 लोकसभा चुनाव और एक उपचुनाव- कुल 18 चुनाव में 10 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।

2019 चुनाव के नतीजे

2019 के चुनाव में सपा प्रत्याशी आजम खां को 559177 (52.69 फीसदी) मत पाकर विजयी हुए। भाजपा प्रत्याशी पी. जयप्रदा नाहटा को 449180 (42.33 फीसदी) मत मिले। कांग्रेस प्रत्याशी संजय कपूर 35009 (3.3 फीसदी) मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में आजम खान ने यहां से चुनाव लड़ा था और जीते भी, लेकिन कुछ दिन बाद ही उन्हें कोर्ट ने सजा सुनाई और वह जेल चले गए। कोर्ट से सजा मिलने के बाद आजम की सदस्यता को रद्द कर दिया गया। इस चुनाव के साथ ही आजम की बदकिस्मती शुरू हो गई। जेल में रहकर आजम ने विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता भी लेकिन आजम की बदकिस्मती ने उनका साथ नहीं छोड़ा। कुछ दिन बाद फिर उनको कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई। आजम तो यहां से खुद चुनाव लड़ नहीं सकते थे इस वजह से उन्होंने आसिम रजा को सपा की टिकट दिलवाई।

2022 में यहां उपचुनाव हुए। इस चुनाव में आजम खान के गढ़ में भाजपा ने सपा प्रत्याशी को 42000 हजार मतों के अंतर से शिकस्त देकर भगवा लहरा दिया। भाजपा प्रत्याशी घनश्याम सिंह लोधी को 367,397 (51.96 फीसदी) मत हासिल हुए। वहीं सपा प्रत्याशी आसिम राजा को 3,25,205 (46.00 फीसदी) वोट मिले। सपा ने पहले रामपुर लोकसभा सीट गंवाई, फिर विधानसभा। ऐसे में 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट सपा के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

2024 में गठबंधन के साथी कौन हैं

2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन था। इस बार भाजपा-रालोद गठबंधन में हैं। इंंडिया गठबंधन में सपा-कांग्रेस शामिल हैं। इंडिया गठबंधन में ये सीट सपा के खाते में है। बसपा अकेले मैदान में है। भाजपा-रालोद गठबंधन में यह सीट भाजपा के हिस्से में है।

चुनावी रण के योद्धा

भाजपा ने दोबारा घनश्याम सिंह लोधी पर विश्वास जताया है। सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम मुहिब्बुलाह नदवी को रामपुर से टिकट दिया है। वहीं बसपा के तरफ से उनके प्रत्याशी जीशान खां हैं।

रामपुर लोकसभा सीट का जातीय समीकरण

2011 की गणना के अनुसार रामपुर क्षेत्र म कुल 50.57 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है, जबकि 45.97 प्रतिशत से अधिक हिंदुओं की जनसंख्या है। रामपुर में मतदाताओं की संख्या 1679506 है। इस सीट पर लोधी करीब 2.50 लाख, कुर्मी करीब 40 हजार, दलित करीब 60 हजार, सैनी करीब 70 हजार, इसके अलावा अन्य समाज भी हैं, जिनकी संख्या 10 से 20 हजार के बीच है। इसी तरह मुस्लिम समाज भी करीब दो लाख पठान, 1.50 लाख अंसारी और 1.50 लाख तुर्क हैं।

रामपुर लोकसभा के विधानसभा सीटों का हाल-चाल

रामपुर लोकसभा की बात करें तो उसमे कुल 5 विधानसभा आती हैं- रामपुर, बिलासपुर, मिलक, स्वार और चमरौआ। इनमें से तीन सीटों पर भाजपा और एक-एक सीट पर अपना दल और सपा का कब्जा है। रामुपर से (आकाश सक्सेना, भाजपा), बिलासपुर से (बलदेव सिंह औलख, भाजपा), मिलक से श्रीमती राजबाला, भाजपा, स्वार से शफीक अहमद अंसारी, अपना दल सोनेलाल और चमरौआ सीट से नसीर अहमद खां, सपा के विधायक हैं।

सियासी गुणाभाग की जमीनी हकीकत

रामपुर लोकसभा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला होने जा रहा है। क्योंकि इस सीट पर जहां बीजेपी ने अपने पुराने सांसद घनश्याम सिंह लोधी पर दांव लगाया है तो वहीं समाजवादी पार्टी ने इमाम मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को चुनावी मैदान में उतारा है। इमाम मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी के सपा से टिकट मिलने पर रामपुर में सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। रामपुर की सियासत में आजम खां का दबदबा रहा है। वह 10 बार यहां से विधायक रहे हैं। राज्य सभा और लोकसभा सदस्य भी रहे। उनकी पत्नी डा. तजीन फात्मा भी शहर विधायक और राज्य सभा सदस्य रहीं। बेटे अब्दुल्ला दो बार विधायक चुने गए, लेकिन अब तीनों सात साल की सजा काट रहे हैं। इस कारण चुनाव भी नहीं लड़ सके।

वहीं बहुजन समाज पार्टी ने इस बार बिल्कुल नए चेहरे पर दांव लगाया है। पठान बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले जीशान खां को अपना उम्मीदवार बनाया है। जीशान खान के चाचा शहाब खान जो बहुजन समाज पार्टी के पूर्व मंडल कोऑर्डिनेटर है। जीशान नया चेहरा तो हैं, लेकिन चुनाव राजनीति में उनका अनुभव कम है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, रामपुर लोकसभा सीट पर जातिगत समीकरण के लिहाज देखें तो यहां पर मुस्लिम मतदाताओं की सबसे अधिक है। मुस्लिम वोटर्स के बाद लोधी वोटर्स आते हैं। यही वजह थी कि बीजेपी ने यहां उपचुनाव में लोधी (घनश्याम) को अपना प्रत्याशी बनाया था जिसका फायदा भी मिला और वो चुनाव जीत गए। सपा के अंदर पार्टी प्रत्याशी को लेकर नाराजगी है, बसपा ने नये लेकिन अनुभवहीन चेहरे को मैदान में उतारा है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी का रास्ता आसान दिखाई देता है।

रामपुर से कौन कब बना सांसद

1952 मौलाना अबुल कलाम आजाद (कांग्रेस)

1957 राजा सैयद अहमद मेहदी (कांग्रेस)

1962 राजा सैयद अहमद मेहदी (कांग्रेस)

1967 जुल्फिकार अली खां (स्वतंत्र पार्टी)

1971 जुल्फिकार अली खां (कांग्रेस)

1977 राजेंद्र कुमार शर्मा (भारतीय लोक दल)

1980 जुल्फिकार अली खां (जनता पार्टी सेक्युलर)

1984 जुल्फिकार अली खां (कांग्रेस)

1989 जुल्फिकार अली खां (कांग्रेस)

1991 राजेंद्र कुमार शर्मा ( भाजपा)

1996 बेगम नूर बानो (कांग्रेस)

1998 मुख्तार अब्बास नकवी (भाजपा)

1999 बेगम नूर बानो (कांग्रेस)

2004 पी. जयप्रदा नाहटा (समाजवादी पार्टी)

2009 पी. जयप्रदा (समाजवादी पार्टी)

2014 डॉ. नैपाल सिंह (भाजपा)

2019 आजम खां (समाजवादी पार्टी)

2022 घनश्याम सिंह लोधी (भाजपा) उपचुनाव

डॉ. आशीष वशिष्ठ/बृजनंदन

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