Saturday, February 14, 2026
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प्रणव मुखर्जी का संगम नगरी से रहा गहरा नाता, राष्ट्रपति रहते तीन बार आए थे प्रयागराज

प्रयागराज।  पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का तीर्थराज प्रयाग से बड़ा ही गहरा नाता रहा। वह यहां की आध्यात्मिक और राजनैतिक चेतना के बड़े ही प्रशंसक थे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए वह संगम नगरी तीन बार आए थे। 

प्रणव मुखर्जी ने प्रयागराज का अंतिम दौरा 13 मार्च 2016 में किया था। उस समय राष्ट्रपति के रुप में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय 150वीं जयंती समारोह का उद्घाटन किया था। इस दौरान उन्होंने दस रुपये के दो सिक्के और दो डाक टिकट को भी जारी किया था। 
इसके पहले निखिल भारत बंग साहित्य समाज के 86वें सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रणब मुखर्जी 25 दिसम्बर 2013 को प्रयागराज  आए थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि तीर्थराज प्रयाग में जिस तरह त्रिवेणी संगम है, उसी तरह विभिन्न भारतीय भाषाएं मिलकर राष्ट्रीय एकता व अखंडता का परिचायक बनें। दरअसल प्रणब मुखर्जी का बंग साहित्य सम्मेलन के साथ पुराना नाता रहा है। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वह स्वयं इस संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। इस दौरे में प्रणव दा ने शहर के प्रतिष्ठित जगत तारन गर्ल्स इंटर कालेज में स्व. चिंतामणि घोष की मूर्ति का अनावरण व नवनिर्मित भवन का लोकार्पण भी किया था। 
वर्ष 2012 में देश के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद उसी साल 25 दिसम्बर को प्रणब मुखर्जी ने प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 9वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में अपना अभिभाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि प्रयागराज के इस ऐतिहासिक शहर में, इस दीक्षांत व्याख्यान के लिए आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। कुम्भ नगरी की आध्यात्मिक चेतना को याद करते हुए उन्होंने कहा था कि गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर बसा हुआ प्रयागराज परंपरागत रूप से आध्यात्मिकता, ज्ञान और अध्ययन का केंद्र रहा है। यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी केंद्र था और इस शहर के नागरिकों ने देश के स्वतंत्रता संघर्ष की अगुआई की। 
इसी तरह वर्ष 2016 में जब वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 150वीं जयंती समारोह का उद्घाटन करने आये थे तो यहां की गौरवशाली न्यायिक परंपरा का गुणगान किया था। इस दौरान उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय, मोती लाल नेहरू, तेज बहादुर सप्रू, केएन काटजू जैसे विद्वान अधिवक्ताओं की भी उन्होंने चर्चा की थी। उस समय उन्होंने यह भी बताया था कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नये विंग की शुरूआत की थी। 
प्रणव मुखर्जी प्रयागराज जब भी आते यह कहना नहीं भूलते थे कि इस ऐतिहासिक नगर ने देश को कई महान विभूतियां दी है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री को इसी शहर ने दिया। वह यह भी कहते थे, ‘‘यहां आकर मैं काफी खुशी महसूस करता हूं।’’ 
गौरतलब है कि 84 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को दिल्ली स्थित सेना के अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। उनके निधन से प्रयागराज समेत समूचे उप्र के लोग दुखी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री योगी ने अपने शोक संदेश में ट्वीट कर कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का निधन राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है। वह सार्वजनिक जीवन में शुचिता, पारदर्शिता एवं स्पष्टवादिता की प्रतिमूर्ति थे। 

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