Wednesday, March 25, 2026
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तेजस्वी की आचार संहिता अधूरी पर सराहनीय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने दल के मंत्रियों के लिए आचार-संहिता जारी की है। यह मेरे हिसाब से अधूरी पर सराहनीय है। सराहनीय इसलिए कि हमारे अधिकांश नेता ही देश में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े स्रोत हैं। यदि उनमें आचरण की थोड़ी-बहुत शुद्धता शुरू होने लगे तो धीरे-धीरे भारतीय राजनीति का शुद्धिकरण काफी हद तक हो सकता है। फिलहाल तेजस्वी ने अपने मंत्रियों से कहा है कि वे बुजुर्गों से अपने पांव छुआना बंद करें। उन्हें नमस्कार करें। हमारे देश में अपने से बड़ों के पांव छूने की जो परंपरा है, दुनिया के किसी भी देश में नहीं है।

जापान में कमर तक झुकने, अफगानिस्तान में गाल पर चुम्मा जमाने और अरब देशों में एक-दूसरे के गालों को छुआने की परंपरा मैंने देखी है लेकिन अपने भारत की इस महान परंपरा को सत्ता, पैसा, हैसियत और स्वार्थ के कारण लोगों ने शीर्षासन करवा रखा है। देश के कई वर्गों के लोगों को मैंने देखा है कि वे अपने से उम्र में काफी बड़े लोगों से अपना पांव छुआने में जरा भी संकोच नहीं करते। बल्कि वे इस ताक में रहते हैं कि बुजुर्ग उनके पांव छुएं तो उनके बड़प्पन का सिक्का जमे। बिहार और उत्तर प्रदेश में तो मंत्रियों, सांसदों और साधुओं के यहां ऐसे दृश्य आम हैं। तेजस्वी यादव इस कुप्रथा को रुकवा सकें तो उन्हें यह कदम बड़ा नेता बनवा सकता है। तेजस्वी ने दूसरी सलाह अपने मंत्रियों को यह दी है कि वे आगंतुकों से उपहार लेना बंद करें। उनकी जगह कलम और किताबें लें। कितनी अच्छी बात है, यह?

लेकिन नेता उन किताबों का क्या करेंगे? किताबों से अपने छात्रकाल में दुश्मनी रखनेवाले ज्यादातर लोग ही नेता बनते हैं। तेजस्वी की पहल पर अब वे कुछ पढ़ने-लिखने लगें तो चमत्कार हो जाए। वरना होगा यह कि वे किताबें भी अखबारों की रद्दी के साथ बेच दी जाएंगी। डर यह भी है कि अब मिठाई के डिब्बों की बजाय किताबों के डिब्बे मंत्रियों के पास आने लगेंगे और उन डिब्बों में नोट भरे रहेंगे। तेजस्वी ने मंत्रियों से कहा है कि वे अपने लिए नई कारें न खरीदवाएं। यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन यह काफी नहीं है। तेजस्वी चाहें तो नेताओं के आचरण को आदरणीय और आदर्श भी बनवाने की प्रेरणा दे सकते हैं। पहला काम तो वे यह करें कि सांसदों और विधायकों की पेंशन खत्म करवाएं। दूसरा, उन्हें सरकारी मकानों में न रहने दें। अब से 50-55 साल पहले वाशिंगटन में मैं 45 डाॅलर महीने के जिस कमरे में रहता था, उसी के पास तीन कमरों में अमेरिका के कांग्रेसमैन और सीनेटर भी किराये पर रहते थे। तेजस्वी खुद बंगला छोड़ें तो बाकी मंत्री भी शर्म के मारे भाग खड़े होंगे। हमारी राजनीति को यदि भ्रष्टाचार से मुक्त करना है तो हमारे नेताओं को आचार्य कौटिल्य और यूनानी विद्वान प्लेटो के ‘दार्शनिक राजाओं’ के आचरण से सबक लेना चाहिए।

(लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं।)

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