Tuesday, March 31, 2026
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कृषि बिल का विरोध किसानों के हित में नहीं, आढ़तियों को फायदा पहुंचाने का षडयंत्र

-कृषि विशेषज्ञों, किसान व राजनीतिक समीक्षक ने रखी अपनी बात

उपेन्द्र राय

लखनऊ (हि.स.)। कृषि कानून को लेकर चल रहा प्रदर्शन वाकई किसानों के हित में नहीं है। कृषि विशेषज्ञ, किसान व राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि यह एक प्रायोजित षडयंत्र है। यह किसान हित में नहीं बल्कि आढ़तियों के हित में कृषि कानून को रद्द करने की मांग की जा रही है। किसानों के हित में यदि बात करनी होती तो सिर्फ एमएसपी को संवैधानिक दर्जा दिये जाने की मांग होती। उससे किसानों को भविष्य में फायदा मिलता।
इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ डाक्टर राम भुवन का कहना है कि यदि किसी को एक विकल्प के बजाय कई विकल्प मिलते हैं तो वह घाटे का सौदा कैसे हो सकता है। अब तक आढ़तियों के चंगुल में फंसे किसानों को इससे मुक्ति दिलाने के लिए यह नया कानून बहुत ही फायदे का सौदा होगा। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि अब किस आधार पर लोग विरोध कर रहे हैं। यह तो नहीं कह सकता लेकिन इस कानून के रद्द होने पर किसानों का नुकसान व आढ़तियों को फायदा पहुंचेगा।
वहीं राजनीतिक विश्लेषक व वरिष्ठ पत्रकार हर्ष वर्धन त्रिपाठी का कहना है कि दरअसल यह आंदोलन ही किसानों द्वारा प्रायोजित नहीं है। इसमें ऐसे लोग अगुवाई कर रहे हैं, जो अरहर और मटर की दाल में पहचान नहीं कर सकते। इनकों एनआरसी की तरह सिर्फ विरोध को बढ़ावा देना है। यदि किसानों के हित की बात की जाए तो एमएसपी को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग जायज हो सकती है।
वहीं गाजीपुर जनपद के प्रगतिशील किसान दिवाकर राय का कहना है कि यह आढ़तियों के हित में किया जा रहा प्रदर्शन है। इससे किसानों का कुछ भी लेना-देना नहीं है। कुछ किसानों को प्रदर्शन के दौरान बरगलाकर लाया गया है। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों पर देखने से एहसास होता है कि प्रदर्शन में किसान कम, आढ़तिये ज्यादा हैं। वहां खाने-पीने का बंदोबस्त भी प्रायोजित लगता है। 
 उन्होंने कहा कि एमएसपी को कानून का दर्जा दिया जाना, किसान हित में हो सकता है लेकिन इस नए कानून को समाप्त करना किसान हित में कत्तई नहीं हो सकता। कुछ ऐसा ही कहना है राकेश प्रधान, सोनू, हिमांशु, प्रयागराज के अजित सिंह आदि किसानों का।
वहीं किसान राजेश मिश्रा का कहना है कि किसानों के हित में चाहे किसान क्रेडिट कार्ड की बात हो या किसान खाता बही या पशु पालकों को किसान की श्रेणी में लाने की बात जो भी हुआ, वह भाजपा ने ही किया है। यह कानून भी किसानों के हित में होगा। कुछ लोगों की मानसिकता होती है, सिर्फ विरोध के लिए विरोध करना। इसी के तहत ये लोग विरोध कर रहे हैं।

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