यूपी पंचायत चुनाव 2021 : जीत देखने से पहले ही जिंदगी की जंग हार गए 20 उम्मीदवार

कोरोना के साये के बीच हुए पंचायत चुनाव के नतीजों पर भी संक्रमण का असर दिखा। प्रदेश में 20 प्रत्याशी ऐसे रहे जो पंचायत चुनाव तो जीत गए लेकिन परिणाम से पहले जिंदगी की जंग हार गए। इनमें सर्वाधिक पांच प्रत्याशी गोरखपुर के और तीन प्रतापगढ़ के रहे। वाराणसी, जौनपुर और अमरोहा के भी 2-2 प्रत्याशी अपनी जीत नहीं देख सके। जबकि सिद्धार्थनगर, देवरिया, मिर्जापुर, चंदौली, गाजीपुर और आगरा के भी एक एक प्रत्याशी को मौत के बाद विजयी घोषित किया गया। एक दर्जन से ज्यादा प्रत्याशियों की मौत की वजह कोरोना है तो चार दिल दौरा पड़ने से चल बसे। गोरखपुर में एक प्रत्याशी की हत्या कर दी गई थी।

गोरखपुर के पिपरौली ब्लाक के मिश्रौलिया गांव के प्रधान प्रत्याशी राघवेन्द्र उर्फ गिलगिल दुबे को चुनाव से एक दिन पहले उनके प्रतिद्वंद्वी शंभू यादव ने गोली मार दी थी। उन्हें केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। मतदान के बाद उनकी मौत हो गई। परिणाम राघवेन्द्र के पक्ष में आया। वहीं खोराबार ब्लाक के गहिरा गांव से बीडीसी के प्रत्याशी रंजीत चौबे उर्फ शिप्पू चुनाव जीत गए हैं। चुनाव के बाद रंजीत की कोरोना से मौत हो गई थी। इसी तरह जंगल कौड़िया ब्लाक की ग्राम पंचायत अहिरौली से प्रधान प्रत्याशी इन्द्रा यादव और बड़हलगंज ब्लाक के जैतपुर से प्रधान प्रत्याशी पवन कुमार साहनी भी चुनाव जीत गए हैं। दोनों को कोरोना ने परिणाम आने से पहले निगल लिया। इसी तरह गुलरिहा थाना क्षेत्र के जंगल हरपुर में प्रधान प्रत्याशी भुआल यादव की तबीयत मतदान के दिन ही बिगड़ गई थी। इलाज के दौरान दूसरे दिन सुबह उनकी मौत हो गई थी। सोमवार को मतगणना में भुआल भी विजयी घोषित किए गए।


प्रतापगढ़ में तीन प्रत्याशियों की मौत के बाद जीत हुई है। इनमें दो ग्राम प्रधान और एक बीडीसी सदस्य के प्रत्याशी थे।कालाकांकर ग्राम पंचायत की निवर्तमान ग्राम प्रधान मंजू सिंह इस बार भी प्रत्याशी थीं। मतदान के दिन उनकी तबीयत बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हो गई। रविवार को मतगणना के बाद उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया। इसी तरह मंगरौरा विकासखंड के मदुरा रानीगंज के निवर्तमान प्रधान व प्रत्याशी रामसुख यादव की एक सप्ताह पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। वह भी रविवार को मतगणना में विजयी घोषित किए गए। कालाकांकर में ही केरावडीह की बीडीसी सदस्य प्रत्याशी रफीकुलनिशा को भी मौत के बाद विजयी घोषित किया गया है। रफीकुल की एक सप्ताह पहले मौत हो गई थी।

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