– कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और पार्टी नेता भी मकबरे पर पहुंचे
वाराणसी (हि.स.)। शहनाई के अजीम फनकार भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की सोमवार को 17वीं पुण्यतिथि मनाई गई। दरगाह फातमान स्थित उस्ताद के मकबरे पर परिजनों और प्रशंसकों ने फातिहा पढ़ी और गुलाब की पंखुरियां अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पुण्यतिथि पर गुलपोशी के साथ ही शहनाई की धुन भी मकबरे पर गूंजी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का पसंदीदा नौहा मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का पढ़ा गया।
21 अगस्त 2006 को उस्ताद की 92 साल की अवस्था में इंतकाल हो गया था। उस्ताद ने गंगा किनारे बालाजी घाट स्थित मंदिर पर लगभग 40 साल तक शहनाई का रियाज किया। वे छह साल की उम्र से ही बनारस में शहनाई बजाने लगे थे। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का जन्म बिहार के बक्सर जिले में हुआ था, लेकिन बचपन से लेकर जिंदगी का आखिरी वक्त काशी में बीता। वर्ष 2001 में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया था। उस्ताद ऐसे बनारसी थे जो गंगा में वज़ू करके नमाज पढ़ते थे और सरस्वती को प्रणाम कर शहनाई की तान छेड़ते थे।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन के प्रवक्ता शकील अहमद जादूगर ने बताया कि पं. जवाहर लाल नेहरू के बुलाने पर उस्ताद ने 15 अगस्त 1947 को जब लाल किले पर तिरंगा फहराया गया तो शहनाई बजाकर आजादी का स्वागत किया था। उस्ताद की कब्र पर पहुंच कर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व विधायक अजय राय, शैलेन्द्र सिंह, प्रमोद वर्मा, फिरोज हुसैन, फातमान के मुतवल्ली शफक रिजवी आदि ने खेराज-ए-अकीदत पेश की।
श्रीधर/मोहित
