प्रोजेक्ट 75 की पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को बदलेंगी : नौसेना प्रमुख

– हिन्द महासागर क्षेत्र के समुद्री परिदृश्य में आईएनएस वेला भारत की समुद्री क्षमता बढ़ाएगी

– भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने में फ्रांसीसी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का योगदान प्रमुख

नई दिल्ली (हि.स.)। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट 75 की पनडुब्बियां आने वाले वर्षों में पानी के भीतर भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को बदलेंगी। भारत की पनडुब्बियों ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी तरह अपने नए अवतार में आईएनएस वेला एक शक्तिशाली मंच है जिसमें संचालन के पूरे स्पेक्ट्रम को शुरू करने की क्षमता है। आज की गतिशील और जटिल सुरक्षा स्थिति को देखते हुए हिन्द महासागर क्षेत्र के समुद्री परिदृश्य में आईएनएस वेला भारत की समुद्री क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एडमिरल करमबीर सिंह गुरुवार को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में प्रोजेक्ट 75 की चौथी पनडुब्बी आईएनएस वेला के कमीशनिंग समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पनडुब्बी का निर्माण करने वाले मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, फ्रांसीसी साझेदार मेसर्स नेवल ग्रुप, मेसर्स एमबीडीए और इस कमीशनिंग के लिए अथक प्रयास करने वाले सभी कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 1967 में फॉक्सट्रॉट के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा का जन्म हुआ था। नौसैनिक रिवाज है कि ‘पुराने जहाज कभी नहीं मरते हैं।’ इस परंपरा को ध्यान में रखते हुए आईएनएस वेला को आज नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा रहा है, जिसका नाम उनके शानदार पूर्ववर्ती से लिया गया है।

नौसेना प्रमुख ने कहा कि फॉक्सट्रॉट श्रेणी की पुरानी पनडुब्बी वेला 1973 में तत्कालीन सोवियत संघ से हासिल की गई थी जो 37 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद 25 जनवरी, 2010 को सेवा मुक्त हो गई थी। आज हम भाग्यशाली हैं कि हमारे बीच कमीशनिंग सीओ रेडम सोढ़ी और तत्कालीन वेला के चालक दल के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने मौजूद स्वदेशी पनडुब्बी भारत की उल्लेखनीय प्रगति के साथ-साथ ‘खरीदार नौसेना से बिल्डर नौसेना’ होने की यात्रा को भी प्रदर्शित करती है। हमने इस यात्रा की एक झलक कुछ दिन पहले भी देखी थी, जब 21 नवंबर को आईएनएस विशाखापत्तनम को कमीशन किया गया था।

भारतीय नौसेना प्रमुख ने कहा कि फ्रांस और भारत के बीच रक्षा संबंधों को 1998 में रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया था। भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों में फ्रांसीसी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र एक प्रमुख भागीदार रहा है। एलौएट हेलीकॉप्टर और पूर्ववर्ती एलाइज़ वाहक एएसडब्ल्यू विमान दो समान विचारधारा वाले देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग के सफल उदाहरण हैं। प्रोजेक्ट-75 दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक समानता का प्रतिनिधित्व करती है और आज की कमीशनिंग इस स्थायी साझेदारी का प्रमाण है। यह परियोजना न केवल नौसेना के लिए, बल्कि अत्याधुनिक रक्षा निर्माण प्रौद्योगिकियों के साथ काम करने की हमारी क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी।

आईएनएस वेला के कमीशनिंग समारोह में सांसद अरविंद सावंत, पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल आर हरि कुमार, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक वाइस एडमिरल नारायण प्रसाद (सेवानिवृत्त) और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ रक्षा, नागरिक एवं सैन्य अधिकारी मौजूद थे।

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