प्रीपेड मीटर : इस्टीमेटेड कास्ट से 60 प्रतिशत अधिक का टेंडर, नियामक आयोग ने उठाए सवाल

-उपभोक्ता परिषद ने की अविलंब टेंडर निरस्त करने की मांग

लखनऊ(हि.स.)। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के चार कलस्टरों में से पहले कलस्टर खुलने के बाद ही सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए उपयुक्त बनाये गये टेंडर पद्धति का खुलासा हो गया। इस टेंडर में सबसे न्यूनतम दर अडानी की हैं, जो इस्टीमेटेड कास्ट से भी 60 प्रतिशत अधिक है। उपभोक्ता परिषद ने इस टेंडर को अविलंब निरस्त करने की मांग की है। वहीं नियामक आयोग ने आरडीएसएस स्कीम केस्को और पूर्वांचल विद्युत निगम को डिफिशिएंसी नोट जारी किया है।

उपभोक्ता परिषद ने इस टेंडर में गड़बड़ी की आशंका जाहिर की थी। दूसरी ओर विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की दाखिल आर0डी0एस0एस स्मार्ट प्रीपेड मीटर स्कीम पर अनेक सवाल उठाए हैं, जिसमें उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु भी शामिल है। केंद्र सरकार के दबाव में उत्तर प्रदेश में चार कलस्टर में निकाले गए पुरानी तकनीकी 4जी स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लगभग 25000 करोड के टेंडर का पहला कलस्टर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में टेंडर का भाग-2 खोला गया। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि इससे यह सिद्ध हो गया कि देश के निजी घराने कैसे मीटर रूपी तराजू पर अपना कब्जा करने के लिए मनगढंत दर डाल रहे हैं। टेंडर खुलने के बाद उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाई गई सभी बातें सिद्ध साबित हुई।

दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में स्मार्ट प्रीपेड मीटर टेंडरिंग परियोजना की कुल कास्ट, जो भारत सरकार की अनुमति से उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियों ने ऐस्टीमेटेड किया था। वह लगभग 4576 करोड 11 लाख थी, जिसको आधार मानकर टेंडर निकाला गया। अब जब टेंडर का भाग-2 दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में खुल गया है, तो उसमें मेसर्स अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, जिनका न्यूनतम दर रुपया 7350 करोड 89 लाख आई है। जो ऐस्टीमेटेड कॉस्ट से 60 प्रतिशत अधिक आई है। टेंडर में द्वितीय न्यूनतम दर मेसर्स जी0एम0आर जनरेशन लिमिटेड की आई है। जो लगभग 7500 करोड 61 लाख यानी कि लगभग 63 प्रतिसत अधिक है। वही टेंडर में तृतीय न्यूनतम दर मैसर्स लार्सन एंड टूब्रो जिनकी दर लगभग 10 हजार 123 करोड है, जो ऐस्टीमेटेड कॉस्ट का लगभग 121 प्रतिशत है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि टेंडर का भाग- 2 खुलने के पहले ही उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व की याचिका के जरिए सभी बातों का खुलासा कर दिया था। यह भी लिखित में दाखिल किया था कि पुरानी तकनीकी 4 जी टेंडर पूरी तरीके से पारदर्शी नहीं है और इसमें पूलिंग की बडी संभावना है। अब जब दरें सामने आ गई हैं, तो बड़ा खुलासा हो गया है। उपभोक्ता परिषद की बात सच साबित हुई।

दूसरी और विद्युत नियामक आयोग ने आरडीएसएस स्कीम के तहत विद्युत नियामक आयोग में दाखिल याचिका पर अनेकों डिफिशिएंसी निकालते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व केस्को वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को एक पत्र लिखकर उसमें अनेकों कमियां निकाली है। सबसे बडा चौंकाने वाला मामला यह है कि उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए, समस्त महत्वपूर्ण बिंदुओं को भी विद्युत नियामक आयोग ने अपने डिफिशिएंसी नोट का महत्वपूर्ण अंग माना है और उस पर जवाब तलब किया गया है।

उपेन्द्र

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