पूर्व राष्ट्रपति ने हरियाणा के सौ गांवों की बदली विकास की परिभाषा

– मेवात और गुरुग्राम के गांंवों में काम कर रही प्रणब मुखर्जी फांउडेशन

चंडीगढ़। भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी हरियाणा के सौ गांवों में विकास की परिभाषा को बदलते हुए सामाजिक क्रांति लाने में कामयाब हुए हैं। प्रणब मुखर्जी ने मेवात और गुरुग्राम के सौ से अधिक गांंवों में लोगों को सामाजिक और मानसिक रूप से विकसित करने का बीड़ा उठाया है। जहां तकनीक, स्वास्थ्य, खुशी, इंसानियत और भाईचारे को बढ़ाने के मूल मंत्र पर काम चल रहा है। प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति रहते हुए 2016 में मेवात का रोजका मेव, गुरुग्राम जिले के सोहना का दौहला, अलीपुर और हरचंद तथा इसी जिले के फरुर्खनगर ब्लाक का ताजनगर गांव गोद लिया था। कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन का गठन किया और 101 गांवों को गोद लेकर बदलाव की कहानी लिखनी शुरू की।फाउंडेशन की निदेशक एवं पूर्व राष्ट्रपति की तत्कालीन सचिव ओमिता पॉल की देखरेख में इन गांवों को स्मार्ट बनाने की मुहिम को गति प्रदान की जा रही है। इनमें मेवात के 20, गुरुग्राम जिले के सोहना ब्लाक के 60 और फर्रूखनगर ब्लाक के 20 गांव शामिल हैं। फाउंडेशन की निदेशक ओमिता पॉल के अनुसार हरियाणा की जगमग योजना से पहले ही प्रणब मुखर्जी के गोद लिए गांवों में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था हो गई थी। इन गांवों में लैंगिक असमानता को दूर करने, वाई-फाई की उपलब्धता, आर्गेनिक खेती, सेल्फ हेल्फ ग्रुप को प्रोत्साहन देते हुए उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने तथा मुफ्त ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां फाउंडेशन की ओर से शिक्षकों की नियुक्ति की गई, ताकि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रह सके। प्रणब मुखर्जी के गोद लिए इन गांवों में जींद जिले के बीबीपुर माडल आफ वूमैन इंपावरमेंट एंड विलेज डेवलपमेंट के माडल को भी लागू किया गया है, जिसके जरिये विकास के साथ-साथ घरेलू व सामाजिक हिंसा का विरोध किया गया। इन गावों में 50 स्कूल ऐसे हैं, जहां मास्टर कम हैं, जिन्हेंं फांउडेशन के खर्च पर इन स्कूलों में रखा गया है। पांच गांवों में आयुष केंद्र बनाए गए, जबकि 13 गांवों में खारे पानी की समस्या के चलते वाटर एटीएम लगाए गए हैं

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