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फॉल आर्मी वर्म कीट से सतर्क रहें गन्ना किसान : जिला कृषि रक्षा अधिकारी

संवाददाता
बहराइच। वातावरण की नमी और तापमान को देखते हुए वर्तमान समय में गन्ने की फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट लगने की सम्भावना है। यह कीट मूल रूप से अमेरिकी मूल का कीट है जो मक्के की फसल को नुकसान पहुॅचाता है। परन्तु मक्के की अनुपलब्धता की दशा में यह गन्ने की फसल पर भी आक्रमण करता है। यह जानकारी देते हुए कृषि रक्षा अधिकारी आर.डी. वर्मा ने बताया कि इस कीट के प्रौढ़ तीब्र उड़ान वाले होते हैं, जो भोजन की तलाश में 100 कि.मी. तक उड़ते हैं। इस कीट की चार अवस्थाएं होती है, अण्डा, लार्वा, (सूडी), प्यूपा एवं वयस्क। इस कीट के अण्डों से 4-6 दिन में सूडी निकलती है जिसकी अवस्था 14-18 दिन की होती है और इसी अवस्था में यह फसलो को सर्वाधिक नुकसान पहुॅचाता है। सूडी नवजात पौधों की गोंफ को हानि पहुॅचाती है और बाद में पत्तियों के बीच के सिरे को छोड़कर पूरी पत्ती को खा जाती है। जिससे फसल बहुत तेजी से नष्ट हो जाती है। इस कीट के सिर पर अग्रेजी वर्णमाला के उल्टा वाई के आकार का चिन्ह होता है तथा सिर के तरफ से आठवें खण्ड पर चार काले रंग के गोल चिन्ह होते हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि कीट के प्रकोप को देखते हुए सभी विकास खण्डों में सहायक विकास अधिकारी (कृषि रक्षा) के नेतृत्व टीम बनाकर लगातार निगरानी का कार्य किया जा रहा है। साथ ही उनके द्वारा भी भ्रमण कर स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। फसलो की सुरक्षा के मद्देनज़र श्री वर्मा ने किसानों को गन्नें की फसल की निगरानी करने की सलाह देते हुए कहा कि कीट के लक्षण दिखाई देते ही सम्बन्धित विकास खण्ड के कृषि रक्षा इकाई अथवा जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मो.न. 9839206867 पर सम्पर्क करें। वर्मा ने किसानों को सुझाव दिया है कि फॉल आर्मी वर्म कीट के नियंत्रण हेतु साइपरमेथ्रिन 25 प्रतिशत की 1 मिली./ली. पानी अथवा क्लोरपायरीफॉस 50 प्रति 2-3 मिली./ली. पानी अथवा प्रोफेनोफॉस 40 प्रति. के साथ साइपरमेथ्रिन 4 प्रति. 2 मिली./ली. अथवा क्लोरपायरीफॉस 20 प्रति ई.सी. 3 मिली./ली. अथवा नीम आयल 4-5 मिली./ली. पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करे।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि उक्त कीट के लगने की दशा में रोगग्रस्त फसल/पौधे के फोटो के साथ विभागीय पी.सी.एस.आर.एस. मो.नं 9452247111 एवं 9452257111 पर व्हाटसएप अथवा मैसेज के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। सभी किसानों से यह भी अपेक्षा की गयी है कि समस्या लिखते समय अपना पूरा नाम व ग्राम, विकास खण्ड एवं तहसील आदि के नाम सहित पूरा पता भी अवश्य अंकित करें। उन्होंने बताया कि समस्या का समाधान 48 घंटे के भीतर कर दिया जायेगा।

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