केन्द्रीय राज्यमंत्री के पैतृक गांव में सड़क का सपना नहीं हो सका साकार

-पांच किमी लम्बी सड़क स्वीकृत होने के बाद भी नहीं मिला बजट
-साध्वी मंत्री के गांव सहित आसपास की सड़कें  भी अब गड्ढों में तब्दील


हमीरपुर(एजेंसी)। सरकार गांव-गांव सड़कों का जाल बिछाने का कार्य कर रही है, लेकिन आजादी के बाद से सुमेरपुर क्षेत्र के पत्योरा गांव से बड़ा कछार सुरौली तक पांच किमी लम्बे सम्पर्क मार्ग की सड़क आज तक नहीं बन सकी। ये गांव केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का पैतृक है जहां की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
वर्ष 2018-19 में बुंदेलखंड विकास निधि से सड़क निर्माण की स्वीकृति शासन ने दे दी है। लेकिन बजट न मिलने से ग्रामीणों का सपना अभी अधूरा है। बारिश से दलदल हुए इस कच्चे संपर्क मार्ग पर वाहन तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है। यही हाल बड़ागांव से टिकरौली संपर्क मार्ग का है। जो बजट के अभाव में अटका है। जिससे क्षेत्रीय लोंगो को बारिश के मौसम में अतिरिक्त चक्कर काटकर जाना पड़ता है।
 राजीव कुमार श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता लोनिवि ने शुक्रवार को बताया कि बुंदेलखंड विकास निधि से 16 सड़कों में 14 सड़कें तैयार हो चुकी हैं। दो सड़कों का बजट न मिलने से निर्माण कार्य प्रभावित है। बारिश का सीजन निकलने के बाद ये सड़कें तैयार की जाएगी। कहा कि सुमेरपुर देवगांव मार्ग में मौरम भरे भारी वाहन निकलने से सड़क ध्वस्त हो गई है। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर डीएम को दी जा चुकी है।
बुंदेलखंड विकास निधि से बननी हैं 16 सड़कें
गांव से गांव को जोड़ने वाले अधिकतर संपर्क मार्ग जर्जर हैं। जिससे इन गांवों में निवास करने वाले लोगों को बारिश के चार महीने मुश्किलों भरे गुजराने हैं। मरीज को जिला अस्पताल ले जाना मतलब मौत को दावत देने के बराबर है। पूर्व सदर विधायक अशोक सिंह चंदेल ने मई 2019 में बुंदेलखंड विकास निधि से इन 16 सड़कों की स्वीकृति कराई थी।
 जिनकी प्रथम किस्त के रूप में शासन ने 348.34 लाख रुपये गतवर्ष जारी हुए थे। तब लोनिवि ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर मिट्टी पुराई व कंकरीट आदि कार्य कराए। इस वित्तीय वर्ष शासन ने 14 सड़कों के लिए 14 करोड़ 57 लाख 43 हजार की दूसरी किस्त दी है। उधर पत्योरा से छोटा कछार पांच किमी व टिकरौली से बड़ागांव तीन किमी सड़क का बजट नहीं मिल है।
आजादी के बाद से अब तक नहीं बनी सड़क
बड़ा कछार निवासी बुजुर्ग बल्देव निषाद ने कहा कि 40 वर्ष पूर्व आरईएस ने सड़क के लिए बड़े साइज के गिट्टे बिछाए थे। तब लगा कि जल्द ही सड़क पर चलने को मिलेगा। लेकिन डामरीकरण न कराए जाने से सपना टूट गया। अब दोबारा सुन रहे हैं सड़क बनेगी कब बनेगी कह नहीं सकते। 
पांच किमी का अतिरिक्त लगाना पड़ रहा चक्कर
बड़ागांव निवासी राजनारायन साहू ने बताया कि गांव से सीधे टिकरौली मुख्य मार्ग को जोड़ने वाला तीन किमी मार्ग स्वीकृत है। ठेकेदार द्वारा पूरे मार्ग में मिट्टी पुराई का कार्य कराया गया है। बीते आठ माह से निर्माण ठप है। सड़क न बनने से मुख्यालय के लिए देवगांव, सिमनौड़ी होकर पांच किमी का चक्कर काटना पड़ता है।
एक वर्ष पूर्व बनी सड़क ध्वस्त
देवगांव निवासी कल्लू प्रसाद ने कहा कि सुमेरपुर की दूरी 6 किमी है। गतवर्ष यह लोनिवि ने सड़क बनाई थी। मौरंग खदान चलने से भारी वाहनों की मार सड़क नहीं झेल पाई। गढ्डों में तब्दील होने से आए दिन दुर्घटनाएं घटती हैं। जिसका शिकार उसका बेटा भी हो गया। जिसके इलाज में तीन लाख रुपये कर्ज लेकर लगा चुका है। कहा कि आरसीसी सड़क बननी चाहिए।

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