कृषि विधेयकों पर गुमराह कर रहा विपक्ष, कांग्रेस देखे अपना घोषणा पत्र : स्वतंत्र देव

लखनऊ (हि.स.)। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  स्वतंत्र देव सिंह ने संसद में पारित कृषि सुधार विधेयकों को लेकर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों द्वारा किये जा रहे विरोध को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने शुरू से ही देश के किसानों को कानून के नाम पर जकडे़ रखा। 

स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि 2013 में खुद राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस के शासन वाले 12 राज्य फल और सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। अब कांग्रेस ही इस एक्ट में बदलाव का विरोध कर रही है। यहां तक कि कांग्रेस का वर्ष 2019 का घोषणा पत्र पढ़ेंगे तो उसमे उन्होंने स्पष्ट रूप से 11वें बिंदु में एपीएमसी को हटाने की बात कही थी। 
उन्होंने कहा कि वास्तव में आज जब कृषि सुधार पर फैसले लिए जा रहे हैं तो किसानों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्षी पार्टियों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार चाहती है कि किसान अपनी भूमि को पूंजीपतियों को बेच दे जबकि तथ्य यह है कि किसानों को इन विधेयकों में पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है, किसानों की भूमि की बिक्री या गिरवी रखना पूर्णतः निषिद्ध है। 
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 55 साल में एक बार कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने की योजना बनाई और उसमें भी बड़ा घोटाला किया। कांग्रेस के पास कृषि व्यवस्था में कोई भी सुधार करने की न तो नीयत थी न ही कोई इच्छाशक्ति। 
उन्होंने कहा कि यह विधेयक 70 वर्षों से हमारे अन्नदाताओं के होने वाले शोषण को समाप्त कर एक नई व सुगम व्यवस्था को स्थापित करेंगे। यह विधेयक एक ऐसा विवाद निवारण तंत्र उपलब्ध कराएंगे जहां किसी भी विवाद व समस्या उत्पन्न होने की स्थिति में किसान तुरंत अपने स्थानीय एसडीएम के पास जा कर अपनी समस्याओं का निवारण करा सकेगा। बकाया राशि होने की स्थिति में किसानों की जमीन पर किसी भी तरह की कार्यवाही करने का अधिकार यह विधेयक नहीं देता है। 
श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री कई बार कह चुके हैं कि देश भर में न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। किसानों के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के सुरक्षा कवच को बरकरार रखा गया है। किसान खाद्य कंपनियों के साथ उत्पादन की बिक्री के लिए प्रत्यक्ष रूप से समझौता कर सकेंगे। किसी भी कारण से यदि किसान की फसल के मूल्य का भुगतान नहीं हो पाया तो कड़े जुर्माने का भी प्रावधान इस विधेयक में रखा गया है। 
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस विधेयक से मंडियों में उत्पादों की बिक्री करते समय प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से लगने वाले सभी तरीके के अतिरिक्त शुल्क कम होंगे। 

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