काशी के डोम राजा जगदीश चौधरी नहीं रहे

– लोकसभा चुनाव-2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहे चुके हैं प्रस्तावक

-डोमराजा परिवार का अहम स्थान, अन्तिम संस्कार के लिए देते हैं अग्नि श्रीधर त्रिपाठी
वाराणसी। धर्म नगरी काशी के मोक्ष तीर्थ महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के डोम राजा जगदीश चौधरी नहीं रहे। कुछ समय से बीमार चल रहे डोमराजा ने मंगलवार को शहर के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। 55 वर्षीय डोमराजा के जांघ में घाव का इलाज चल रहा था। डोमराजा के निधन की जानकारी होते ही उनके त्रिपुरा भैरवी घाट स्थित आवास पर भीड़ जुट गई। डोमराजा जगदीश चौधरी 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन में प्रस्तावक रहे। 
प्रधानमंत्री का प्रस्तावक बनने पर डोमराजा ने कहा था कि ‘मेरे बिरादरी के लिए और मेरे लिए गर्व की बात है, पहली बार किसी राजनीतिक दल ने हमें यह पहचान दी है। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमें पहचान दी है। हम समाज में पहचान पाने को तरस गए थे। उम्मीद है, नरेंद्र मोदी जी जीतने के बाद हमारी पीड़ा समझेंगे और हमें वह दर्जा समाज में दिलाएंगे जिसकी शुरुआत आज हुई है।
गौरतलब हो कि धर्म नगरी काशी में डोमराजा के परिवार का अहम स्थान है। मोक्ष तीर्थ मणिकर्णिकाघाट और हरिश्चन्द्रघाट पर जब तक डोमराजा परिवार के लोग अग्नि नहीं  देते चिता नहीं जलती है। दोनों घाटों पर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी इसी परिवार पर है। काशी में इस जिम्मेदारी के कारण ही इन्हें जनमानस में डोम राजा कहा जाता है। डोमराजा परिवार में 100-150 सदस्य है। जो न सिर्फ काशी बल्कि जौनपुर, बलिया, गाजीपुर के अलावा अन्य जगहों पर रहते हैं और दाह संस्कार कराते है। काशी वो जगह है जहां मृतक को सीधे मोक्ष प्राप्त होता है इसलिए यहां इन डोम राजा का बड़ा महत्व है।

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