कानपुर में पकड़े गये आतंकियों के मददगारों का होगा लाई डिटेक्टर टेस्ट

डिजिटल के प्रयोग से बचते थे मददगार, फोन के जरिये एटीएस जोड़ रही कड़ियां

कानपुर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पकड़े गये आतंकी संगठन अलकायदा के आतंकियों के तार बराबर कानपुर से जुड़ रहे हैं। जांच कर रही एटीएस अब तक कानपुर के 40 लोगों को संदिग्ध माना है और 27 से पूछताछ हुई है। इनमें से तीन पर काफी हद तक सबूत भी मिल गये हैं। चार संदिग्धों की भूमिका आतंकियों को ट्रैवल कराने की है और चारों ट्रैवल एजेंट भी हैं। इसके साथ ही 13 अपने-अपने घरों से लापता हैं। जिन तीन संदिग्धों पर अहम सबूत मिले हैं उनसे सच्चाई जानने के लिए एटीएस लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी में है। इन तीनों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि डिजिटल का प्रयोग नहीं करते थे। ऐसे में फोन के जरिये एटीएस कड़ियां जोड़ रही है।

उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की टीम ने बीते दिनों राजधानी लखनऊ से मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन को पकड़ा था। इसके बाद मुस्तकीम, शकील और जैद भी पकड़े गये। एटीएस का दावा है कि आतंकी संगठन अलकायदा के अंसार गजवातुल हिंद से यह आतंकी जुड़े हैं और स्वतंत्रता दिवस के पहले उत्तर प्रदेश में बड़ी आतंकी घटना करने की फिराक में थे। इसके बाद से एटीएस इनसे जुड़े लोगों को तलाश कर रही है और कानपुर में अकेले 40 संदिग्धों के नाम सामने आ चुके हैं। इन संदिग्धों की जानकारी जुटाने के लिए एटीएस बराबर कानपुर में डेरा डाले हुए है। सूत्रों के मुताबिक 13 संदिग्ध अपने—अपने घरों से लापता हो गये हैं, जिनके विषय में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। 27 संदिग्धों से पूछताछ हुई, जिनमें तीन की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध हैं और एटीएस को कुछ अहम सुराग में हाथ लगे हैं। चार ट्रैवल एजेंट है जो आतंकियों को ट्रैवल कराते थे।

लाई डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी

एटीएस ने जिन तीन संदिग्धों को पकड़ा है और अहम सुराग हाथ लगे हैं उन तीनों का लखनऊ में पकड़े गये पांचों आतंकियों से आमना-सामना कराया गया। सूत्रों के अनुसार कानपुर के तीन संदिग्धों के चेहरों का जो आवभाव रहा उससे यह साफ हो गया कि आतंकियों को पहचानते हैं, लेकिन कोई भी बातों का सही जवाब नहीं दिये। जिससे अब एटीएस तीनों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

डिजिटल से दूर रहते थे संदिग्ध

सूत्रों का कहना है कि जिन तीन लोगों की भूमिका संदिग्ध है और कुछ अहम सबूत एटीएस को हाथ लगे हैं वह तीनों डिजिटल से दूर रहते थे। बताया यह भी जा रहा है कि पकड़े गये आतंकियों का साफ निर्देश था कि डिजिटल के प्रयोग से परहेज करें, क्योंकि डिजिटल के प्रयोग से जल्द पकड़ने की संभावना है। इसी के चलते एटीएस को उनके सोशल प्लेटफार्म में कुछ खास नहीं मिला। ऐसे में अब एटीएस के पास मोबाइल नंबर ही एकमात्र सहारा बचा है जिसके जरिये संदिग्धों की कड़ियां जोड़ी जा सकें। वहीं एटीएस लापता 13 संदिग्धों के ठिकानों पर बराबर छापेमारी कर रही है और उनसे जुड़े लोगों को भी ट्रैस किया जा रहा है।

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