उप में विपक्ष की आवाज दबाने के काम में हो रहा सरकारी तंत्र का दुरुपयोग-अखिलेश

कानून और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों संभालने में योगी सरकार नाकाम

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार न तो कानून व्यवस्था संभाल पा रही है और नहीं स्वास्थ्य व्यवस्था। नेताओं, अफसरों और माफियाओं के गठजोड़ से स्थिति बिगड़ती जा रही है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग विपक्ष की आवाज दबाने के काम में हो रहा है। इससे समाज का हर वर्ग परेशान है। सरकार में भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता आम बात है। ध्वस्त कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए विपक्ष पर आरोप मढ़ देती है। नृशंस अपराधी अपनी गतिविधियां बेखौफ चलाते रहते है, सरकार और उसका पूरा प्रशासनिक तंत्र क्यों सोता रहा? सरकार को यह तो स्पष्ट करना चाहिए कि कानपुर का अपराधी किसके सम्पर्क में रहा है और कौन सत्ताधीश उससे मिलने आते थे?     उन्होंने कहा कि अपराधियों को संरक्षण, भाजपा के लोगों को हर अपराध में आरक्षण और जनता के लिए संघर्षशील समाजवादियों पर झूठे मुकदमे लगाना ही भाजपा का रामराज्य है। मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के सांसद डाॅ. एस.टी. हसन, चार विधायकों, एक पूर्व विधायक समेत 50 समाजवादी कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए। भाजपा दमन के रास्ते पर चल रही है। समाजवादी कार्यकर्ता बाहर से आए श्रमिकों को भोजन बांट रहे थे तो उन पर भी मुकदमे लगा दिए गए। सरकार बदले की भावना से काम करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कोरोना संकट की आड़ में अपनी लापरवाहियों पर पर्दा डालती रही है। किसी की जिन्दगी से खिलवाड़ किया जाना शर्मनाक है। मेरठ में 2500 रुपये लेकर कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट देने का गोरखधंधा चल रहा है। रामपुर में एक क्वारंटाइन सेंटर में युवक ने छत से कूद कर जान दे दी। परिजनों ने सेंटर पर अव्यवस्था और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। सफाई कर्मियों को कोरोना योद्धा घोषित कर उन्हें मालाएं पहनाने वालों को शर्म आनी चाहिए कि उन्नाव में उन्हें कई माह से वेतन नहीं दिया गया है उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है।    कोरोना संकट के दौर में सरकार की लापरवाही की शिकायतें राजधानी लखनऊ में भी मिल रही है। मुख्यमंत्री की टीम-इलेवन हो या नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी अब सभी अपने दायित्वों के निर्वहन में टालमटोल करने लगे हैं। एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा कर अपनी गलतियां छुपा रहे है। इसके नतीजे कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसका अंदाजा होते हुए भी सब आंखे मूंदे हुए है।

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