आयुक्त की अध्यक्षता में मंडल स्तरीय कृषि निर्यात निगरानी समिति की बैठक संपन्न

निर्यात योग्य कृषि उत्पादों के कलस्टरों के विकास में शीघ्र कार्यवाही करें अधिकारी : आयुक्त

जानकी शरण द्विवेदी

गोण्डा। देवीपाटन मंडल के आयुक्त एसवीएस रंगाराव की अध्यक्षता में आयुक्त कार्यालय में मंडल स्तरीय कृषि निर्यात निगरानी समिति की प्रथम बैठक संपन्न हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति 2019 के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए देवीपाटन मंडल के चारों जनपदों में निर्यात योग्य कृषि उत्पादों के लिए क्लस्टर सुविधा इकाई का गठन, जनपद स्तर पर निर्यात योग्य कृषि उत्पाद के चयन, जनपद स्तर पर गठित जिला क्लस्टर सुविधा इकाई के द्वारा निर्यात योग्य कृषि उत्पाद के क्लस्टर बनाने तथा उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति 2019 के अंतर्गत गठित क्लस्टरों एवं उससे जुड़े निर्यातकों को निर्यात दायित्व सिद्ध होने पर ही दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि आदि के संबंध में विस्तृत चर्चा व समीक्षा की गई।
बैठक में आयुक्त ने उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति 2019 के विजन का उल्लेख करते हुए बताया कि कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नए ढांचे की व्यवस्था करना, कृषि फसलों एवं उत्पादों के निर्यात की क्षमता का सदुपयोग करना तथा किसानों एवं अन्य हित धारकों की आय पर्याप्त रूप से बढ़ाना कृषि निर्यात नीति का विजन है। राष्ट्रीय कृषि निर्यात में वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश का योगदान मात्र 7.3 प्रतिशत है, जिसको 2024 तक दोगुना करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के द्वारा 5 वर्षीय से निर्यात नीति 2019 बनाई गई है। जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश से कृषि निर्यात को वर्ष 2024 तक रुपया 17,591 करोड़ के वर्तमान मूल्य से 2 गुना लगभग रुपया 34 हजार करोड़ करना है। नीति के अंतर्गत पर्यावरण सुरक्षित करने वाले कृषि उत्पादों के निर्यात को सुगम करना और अप्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यात के मूल्य वर्धित उत्पादों की ओर जाना है। उन्होंने कहा कि निर्यात के लिए उन संभावित कृषि फसलों के उत्पादों की पहचान करना और बढ़ावा देना जो देशी एवं जैविक हैं, और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीति का उद्देश्य निर्यात योग्य कृषि उत्पादों और वैश्विक अवसरों से संबंधित जानकारी को किसानों तक पहुंचाने के लिए ढांचा विकसित करना तथा कृषि क्षेत्र में निर्यात को बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच सह क्रियाशील अवसरों पर ध्यान देना है।
कृषि निर्यात नीति 2019 के कार्यान्वयन हेतु जिला स्तर पर कलस्टर सुविधा इकाई, मंडल स्तर पर मंडल स्तरीय कृषि निर्यात निगरानी समिति तथा राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय कृषि निर्यात निगरानी समिति का गठन शासन द्वारा किया गया है। जिला स्तर पर गठित क्लस्टर सुविधा इकाई के द्वारा निर्यात योग्य कृषि उत्पाद के क्लस्टर के गठन करने तथा क्लस्टर के विकास कार्यों की निगरानी का कार्य किया जाएगा। मंडल स्तरीय निगरानी समिति निर्यात योग्य कृषि उत्पाद और उत्पादन के लिए गठित क्लस्टरों के विकास कार्यों की समीक्षा करेगी तथा मंडल स्तर पर निर्यात की स्थिति की भी समीक्षा करेगी। आयुक्त ने कृषि निर्यात निगरानी समिति व क्लस्टर सुविधा इकाई से संबंधित अधिकारियों व नामित सदस्यों से अपेक्षा की है कि वे निर्यात नीति के उद्देश्यों के अनुरूप कार्रवाई करते हुए क्लस्टरों के विकास में अपना योगदान दें, ताकि किसानों को अधिकाधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि मंडल के जनपदों में उन की भौगोलिक स्थिति के अनुसार उत्पादों यथा हल्दी, अदरक व आम आदि के उत्पादों का कलस्टर विकसित करने का प्रयास हो ताकि किसानों का अधिकाधिक हित हो सके। उन्होंने इसके लिए सभी संबंधितों से अपेक्षा की है कि वे किसानों को जागरूक करें ताकि मंडल के जनपदों में पर्याप्त संख्या में कलस्टर बन सके और उन क्षेत्रों में अब तक की जा रही परंपरागत कृषि की अपेक्षा किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
बैठक में सदस्य सचिव, मंडल स्तरीय कृषि निर्यात नीति निगरानी समिति व सहायक कृषि विपणन अधिकारी गंगा दयाल ने बताया कि इस नीति के अंतर्गत निर्यात कलस्टर के लिए न्यूनतम 50 हेक्टेयर की कृषि भूमि होनी चाहिए। यह भूमि 20-20 हेक्टेयर की आपस में निरंतरता में हो सकती है। क्लस्टर के पास उससे संबंधित कुटीर उद्योग भी स्थापित हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि कृषि, उद्यान व अन्य संबंधित कुल 17 विभागों को इसमें सदस्य बनाया गया है। जनपद बलरामपुर में आम का एक क्लस्टर बन रहा है उन्होंने बताया कि कृषि निर्यात और पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी में डिग्री, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए उत्तर प्रदेश में स्थित विश्वविद्यालयों व सरकारी संस्थानों में वार्षिक फीस का 50 प्रतिशत या रुपया 50 हजार प्रति छात्र की अधिकतम सीमा के अंतर्गत प्रदान किया जाएगा। 15 महीने से अधिक की अवधि के पाठ्यक्रमों हेतु फीस के लिए रुपया 100000 दिया जाएगा। इस प्रकार के उच्च शिक्षा कार्यक्रम प्रारंभ करने वाले राजकीय संस्थानों को एक मुश्त रुपया 50 लाख अनुदान दिया जाएगा। बैठक में संयुक्त निदेशक कृषि पीके गुप्ता, उप निदेशक उद्यान, सहायक कृषि विपणन अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण व सदस्यगण उपस्थित रहे।

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